क्या चुनाव आयोग में कई मुद्दों पर आपसी मतभेद? उठा सियासी तूफान, विपक्ष ने कर दिया हल्लाबोल

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और आयोग के आईटी डिवीजन द्वारा मतदाता सूची संशोधन, नए मतदाताओं के पंजीकरण और डिजिटल डेटाबेस से जुड़े कई अहम फैसले उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए हैं।

Election Commission Row: चुनाव आयोग में मतभेद की खबरों को लेकर आई एक रिपोर्ट को लेकर सियासी घमासान मच गया है। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत के चुनाव आयोग (ECI) के भीतर एक बड़ा और अभूतपूर्व टकराव सामने आया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में लिए गए निर्णयों और जारी आदेशों पर पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार ऑन-रिकॉर्ड यानी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई हैं। दोनों आयुक्तों का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और आयोग के आईटी डिवीजन द्वारा मतदाता सूची संशोधन, नए मतदाताओं के पंजीकरण और डिजिटल डेटाबेस से जुड़े कई अहम फैसले उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए हैं।

ECI members

ECI के सदस्यों में मतभेद की रिपोर्ट पर सियासी हंगामा

एक अहम विवाद का मुद्दा फॉर्म 6 से जुड़ा

एक अहम विवाद का मुद्दा फॉर्म 6 से जुड़ा है, जो नए मतदाताओं द्वारा पंजीकरण के लिए अनिवार्य आवेदन पत्र है। रिपोर्ट संधू और जोशी ने इस बात पर जोर दिया कि फॉर्म 6 मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में निहित है और बिना औपचारिक सरकारी अधिसूचना के इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मई में दोनों आयुक्तों द्वारा आपत्ति जताए जाने के बावजूद, फॉर्म का एक संशोधित संस्करण, जिसमें आवेदकों से पूछा गया था कि क्या उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली मतदाता सूची में दर्ज था, आयोग के डिजिटल पोर्टल पर जारी कर दिया गया। इसके बाद संधू ने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर इस बदलाव को तुरंत वापस लेने की मांग की और चेतावनी दी कि इससे पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने का खतरा है।

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