क्या चुनाव आयोग में कई मुद्दों पर आपसी मतभेद? उठा सियासी तूफान, विपक्ष ने कर दिया हल्लाबोल

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और आयोग के आईटी डिवीजन द्वारा मतदाता सूची संशोधन, नए मतदाताओं के पंजीकरण और डिजिटल डेटाबेस से जुड़े कई अहम फैसले उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए हैं।

Election Commission Row: चुनाव आयोग में मतभेद की खबरों को लेकर आई एक रिपोर्ट को लेकर सियासी घमासान मच गया है। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत के चुनाव आयोग (ECI) के भीतर एक बड़ा और अभूतपूर्व टकराव सामने आया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में लिए गए निर्णयों और जारी आदेशों पर पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार ऑन-रिकॉर्ड यानी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई हैं। दोनों आयुक्तों का कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और आयोग के आईटी डिवीजन द्वारा मतदाता सूची संशोधन, नए मतदाताओं के पंजीकरण और डिजिटल डेटाबेस से जुड़े कई अहम फैसले उनकी जानकारी या सहमति के बिना लिए गए हैं।

ECI members

ECI के सदस्यों में मतभेद की रिपोर्ट पर सियासी हंगामा

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के तीखे सवाल

इसी रिपोर्ट को लेकर विपक्ष ने चुनाव आयोग को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने एक्स पर कहा- अगर इस रिपोर्ट में बताए गए स्पष्ट तथ्य सही हैं, तो ऐसा लगता है कि @ECISVEEP के संचालन में किसी अदृश्य शक्ति का हाथ है। अगर नियमों का कथित रूप से पालन नहीं किया गया और सर्वसम्मति या बहुमत के बिना निर्णय लिए गए, तो @ECISVEEP के सभी निर्णय स्वतः ही मनमाने और अनुचित हैं। यह महाभियोग की कार्यवाही पर गंभीरता से विचार करने का एक उपयुक्त मामला हो सकता है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण मूल प्रश्न यह है कि @ECISVEEP की विश्वसनीयता को कैसे बहाल किया जाएगा।

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