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Operation Ajay: इजराइल से दिल्ली पहुंची दूसरी फ्लाइट, अब तक निकाले गए 447 भारतीय

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Oct 14, 2023, 09:10 AM IST

Operation Ajay: युद्धग्रस्त इजराइल से अब तक 447 भारतीय नागरिकों को निकाला गया है। एक दिन पहले यानी शुक्रवार को 212 भारतीय नागरिकों को लेकर पहली फ्लाइट दिल्ली पहुंची थी। आज 235 भारतीय नागरिक दिल्ली पहुंचे हैं।

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ऑपरेशन अजय के तहत इजराइल से निकाले गए भारतीय

Photo : ANI

Operation Ajay: इजराइल में जारी संघर्ष के बीच भारत सरकार द्वारा चलाए गए ऑपरेशन अजय के तहत शनिवार (आज) को भारतीय नागरिकों को लेकर दूसरी फ्लाइट सुरक्षित वापस लौट आई है। इस फ्लाइट में 235 भारतीय नागरिकों को इजराइल से दिल्ली लाया गया है, जिसमें दो नवजात भी शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक, फ्लाइट ने रात 11:02 बजे उड़ान भरी थी।

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विदेश राज्य मंत्री राजकुमार रंजन सिंह ने भारतीय नागरिकों की अगवानी की। उन्होंने कहा, इज़राइल से लगभग 235 नागरिकों को निकाला गया है। उन्होंने कहा, हम ऑपरेशन अजय जारी रखेंगे और हर भारतीय को निकालेंगे। इजराइल में गभग 18,000 भारतीय नागरिक हैं। यह दूसरा चरण है, इसलिए हम उनकी मदद कर रहे हैं।

अब तक निकाले गए 447 भारतीय

बता दें, युद्धग्रस्त इजराइल से अब तक 447 भारतीय नागरिकों को निकाला गया है। एक दिन पहले यानी शुक्रवार को 212 भारतीय नागरिकों को लेकर पहली फ्लाइट दिल्ली पहुंची थी। आज 235 भारतीय नागरिक दिल्ली पहुंचे हैं। बता दें, ऑपरेशन अजय के तहत इजराइल में रह रहे भारतीय नागरिकों को वापस लाने का खर्च भारत सरकार उठा रही है।

फ्लाइट में लगे वंदे मातरम के नारे

युद्ध में फंसे भारतीयों का मुल्क वापसी पर उत्साह चरम पर था। इस दौरान भारतीय नागरिकों ने फ्लाइट में वंदे मातरम के नारे भी लगाए और मोदी सरकार को धन्यवाद दिया। तेल अवीव से दूसरी उड़ान भरने से पहले एक भारतीय यात्री आशीष कुमार ने कहा, मैं भारत जा रहा हूं। यहां, मैं कृषि अनुसंधान संगठन में पोस्ट-डॉक्टरल छात्र हूं। मध्य इज़राइल में स्थिति काफी सामान्य है , गाजा सीमा, बेर्शेबा और आस-पास के क्षेत्रों की तरह यहां के हालात नहीं हैं। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि यह भारत सरकार की बहुत अच्छी पहल है। मैंने केवल यूरोपीय देशों को अपने नागरिकों को निकालते देखा है। इसलिए, मैं इसके लिए सरकार की सराहना करता हूं। एक अन्य यात्री वागेश द्विवेदी ने भी इस पहल की सराहना की और पूर्व मंत्री सुषमा स्वराज के कार्यकाल को याद किया। उन्होंने कहा, मैं एआरओ में एक विजिटिंग साइंटिस्ट के रूप में काम करता हूं। बमबारी के कारण यहां स्थिति तनावपूर्ण है, और यह और भी गंभीर हो जाएगी। इसलिए, हम जा रहे हैं। घर पर हर कोई डरा हुआ है। ऑपरेशन अजय एक बहुत ही सकारात्मक कदम है और मैं वास्तव में इसकी सराहना करता हूं। सरकार सुषमा स्वराज के समय से ही ऐसे मिशन चला रही है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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