Space Expo: भारतवंशी नासा अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने बुधवार को अंतरिक्ष में काम करने की चुनौतियों और भविष्य के स्पेस स्टेशनों में नई तकनीकों की जरूरत पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर काम का दबाव काफी अधिक है और लंबे समय से चली आ रही प्रक्रियाओं में बदलाव करना आसान नहीं है।
भारतवंशी सुनीता विलियम्स (फाइल फोटो)
सुनीता विलियम्स ने बेंगलुरु में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि स्पेस मिशनों में सुरक्षा और विश्वसनीयता सबसे अहम है, लेकिन इसके कारण प्रक्रियाओं में कुछ स्तर की नौकरशाही भी आ गई है। उन्होंने कहा, ''आईएसएस पर काम का काफी दबाव रहता है और लंबे समय से चली आ रही प्रक्रियाओं में बदलाव करना आसान नहीं है।''
सुनीता विलियम्स ने कहा कि आईएसएस लगभग 25 सालों से अंतरिक्ष में काम कर रहा है और अब जब वह संचालन के अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है, तब भविष्य के स्पेस स्टेशनों के लिए नए तरीके और बुनियादी ढांचे पर विचार करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि भविष्य में चाहे स्पेस स्टेशन व्यावसायिक हों या सरकारी, उन्हें शुरुआत से ही ऐसी तकनीकों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना चाहिए, जो अंतरिक्ष यात्रियों के काम को आसान और अधिक प्रभावी बना सकें।
अंतरिक्ष में इंटरनेट जैसा डेटाबेस उपलब्ध नहीं
सुनीता विलियम्स ने आगे धरती और अंतरिक्ष के बीच एक बड़े अंतर का उल्लेख करते हुए कहा कि पृथ्वी पर किसी सवाल का जवाब जानने के लिए लोग अक्सर तुरंत अपना फोन निकालकर इंटरनेट पर जानकारी खोज लेते हैं, लेकिन आईएसएस पर ऐसा करना आसान नहीं है।
उन्होंने कहा कि आईएसएस पर ऐसा व्यापक डेटाबेस उपलब्ध नहीं है, जिससे अंतरिक्ष यात्री हर सवाल का जवाब तुरंत खोज सकें। ऐसे में उन्हें जमीन पर मौजूद टीमों के साथ बेहतर संचार पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य की तकनीक अंतरिक्ष यात्रियों को ऐसा डेटाबेस उपलब्ध करा सकेगी, जिसे वे सीधे नए स्पेस स्टेशनों पर इस्तेमाल कर सकें।
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अंतरिक्ष में 3D प्रिंटिंग भी बड़ी चुनौती
सुनीता विलियम्स ने अंतरिक्ष में 3डी प्रिंटिंग को भी एक अहम चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष में भरोसेमंद तरीके से 3डी प्रिंटिंग करना आसान नहीं है। यहां तक कि कागज पर प्रिंट करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि प्रिंटर गुरुत्वाकर्षण पर निर्भर करते हैं।
उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष यात्री प्रिंटर के साथ कई बार जूझते हैं, क्योंकि धरती पर इस्तेमाल होने वाली मशीनों को गुरुत्वाकर्षण को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जाता है। ऐसे में भविष्य में ऐसी मशीनें विकसित करने की जरूरत होगी, जो बिना गुरुत्वाकर्षण के भी प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
'अंतरिक्ष स्टेशन बनाना आसान नहीं'
सुनीता विलियम्स ने खुद को भाग्यशाली बताते हुए कहा कि उन्हें आईएसएस के निर्माण का हिस्सा बनने का अवसर मिला। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ मिलकर स्पेस स्टेशन के निर्माण और उसे अंतरिक्ष में स्थापित करने के काम में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल आसान काम नहीं था, लेकिन उन्हें भरोसा है कि भारत भी इस तरह की चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार है।
