केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को माओवादियों द्वारा हाल ही में दिए गए संघर्षविराम प्रस्ताव को सख्ती से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि सरकार नक्सलवाद पर किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। शाह ने कहा कि यदि नक्सली हथियार डालकर आत्मसमर्पण करना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है, लेकिन संघर्षविराम की कोई आवश्यकता नहीं है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (फोटो- @amitshah)
ये भी पढ़ें- झूठ बोल रहे हैं NATO चीफ- यूक्रेन जंग को लेकर किए गए दावे को भारत ने किया खारिज, बता दी असलियत
आत्मसमर्पण का रास्ता खुला
शाह ने कहा, “अगर आप आत्मसमर्पण करना चाहते हैं तो संघर्षविराम की जरूरत नहीं है। हथियार डाल दें, एक भी गोली नहीं चलेगी।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ मिलेगा और उनका “भव्य स्वागत” किया जाएगा।
‘नक्सल मुक्त भारत’ का संकल्प
गृहमंत्री ने यह बयान ‘नक्सल मुक्त भारत’ पर आयोजित संगोष्ठी के समापन सत्र में दिया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के पीछे विकास की कमी को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। इसके विपरीत, “लाल आतंक” के कारण ही कई दशकों तक प्रभावित क्षेत्रों में विकास रुक गया।
वामपंथी दलों पर निशाना
शाह ने वामपंथी दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्होंने नक्सलवाद को वैचारिक आधार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल हत्याओं पर रोक लगा देने से नक्सलवाद खत्म नहीं होगा, क्योंकि इसकी जड़ें विचारधारा में हैं। उन्होंने कहा, “देश में नक्सल समस्या क्यों पैदा हुई और क्यों बढ़ी? इसका कारण यह है कि समाज के ही कुछ वर्गों ने उन्हें वैचारिक, कानूनी और वित्तीय समर्थन दिया। जब तक ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें बेनकाब नहीं किया जाएगा, तब तक नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई अधूरी रहेगी।”
ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट के बाद प्रस्ताव
माओवादियों ने हाल ही में संघर्षविराम का प्रस्ताव रखा था। यह पेशकश उस समय आई जब सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर ‘ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट’ चलाकर कई शीर्ष नक्सलियों को ढेर किया था। शाह ने इसे नक्सलियों की रणनीतिक चाल बताते हुए खारिज कर दिया।
2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने का दावा
गृहमंत्री ने भरोसा जताया कि भारत 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बल और सरकार इस दिशा में ठोस और निर्णायक कदम उठा रही है।
