Nitish Kumar Oath: जदयू नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा में अपनी पारी की शुरुआत आज से कर दी है। राज्यसभा सांसद के तौर पर शुक्रवार को नीतीश कुमार ने शपथ ली। नीतीश कुमार पहली बार राज्यसभा पहुंचे हैं। राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने अपने कक्ष में एक संक्षिप्त समारोह में उन्हें उच्च सदन की सदस्यता की शपथ दिलाई।
नीतीश कुमार ने राज्यसभा सांसद के तौर पर ली शपथ
नीतीश कुमार ने ली हिंदी में शपथ
नीतीश कुमार ने केंद्रीय मंत्री एवं सदन के नेता जे पी नड्डा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की मौजूदगी में हिंदी में शपथ ली। जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) के नेता एवं पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, कांग्रेस नेता जयराम रमेश तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता, सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी भी शपथ ग्रहण के दौरान मौजूद थे।
बिहार में नीतीश युग का अंत?
नीतीश कुमार के राज्यसभा सदस्य बनने के साथ ही बिहार में उनका शासनकाल समाप्त हो जाएगा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) 14 अप्रैल को बिहार के नए मुख्यमंत्री का चुनाव कर सकता है। इस बीच अटकलें लगाई जा रही हैं कि कुमार के पुत्र निशांत को नई सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में जगह दी जा सकती है। निशांत ने पिछले महीने जदयू की सदस्यता ली थी। बिहार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद शपथ लेंगे और जल्द ही मुख्यमंत्री पद छोड़ देंगे। चौधरी ने कहा, ’’बिहार में राजग सरकार बनेगी और निश्चित रूप से नीतीश कुमार द्वारा बनाए गए ’नीतीश मॉडल’ का अनुसरण करेगी, जैसा कि पिछले 20 वर्षों से होता आ रहा है।’’
बिहार सीएम पर फैसला कब तक?
आज नई दिल्ली में बिहार बीजेपी नेताओं की एक उच्चस्तरीय बैठक भी हो रही है, जिसमें राज्य के नए नेतृत्व के लिए रोडमैप को अंतिम रूप दिया जाएगा। हालांकि, संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार नीतीश कुमार राज्यसभा सांसद चुने जाने के बावजूद अगले छह महीने तक बिहार के मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं। नियमों के तहत सांसद चुने जाने के बाद 14 दिनों के भीतर उनका विधान परिषद (MLC) पद से इस्तीफ़ा देना अनिवार्य था। भारतीय संविधान के Article 101 of the Constitution of India, जो "सीटों के रिक्त होने" से संबंधित है, के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक साथ संसद का सदस्य और किसी राज्य की विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं रह सकता। इस अनुच्छेद की धारा (2) में स्पष्ट कहा गया है कि कोई व्यक्ति संसद और राज्य की विधानमंडल- दोनों का सदस्य एक साथ नहीं हो सकता। यदि कोई व्यक्ति दोनों सदनों के लिए चुना जाता है, तो राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए नियमों में तय अवधि समाप्त होने पर संसद की उसकी सीट स्वतः रिक्त हो जाएगी, जब तक कि वह पहले राज्य विधानमंडल की अपनी सीट से इस्तीफा न दे दे।
देश और दुनिया की ताजा ख़बरें (News in Hindi) पढ़ें हिंदी में और देखें छोटी बड़ी सभी न्यूज़ Times Now Navbharat Live TV पर। देश (India News) अपडेट और (आज की ताजा खबर) के लिए जुड़े रहे Times Now Navbharat से ।
