Delhi Blast: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली धमाके मामले की जांच तेज कर दी है। दिल्ली पुलिस ने केस से जुड़े सभी दस्तावेज उसे सौंप दिए हैं। इस बीच, जांच एजेंसियों ने श्रीनगर से एक और डॉक्टर को हिरासत में ले लिया। इस डॉक्टर का नाम तजामुल है। दिल्ली ब्लास्ट केस के सिलसिले में कश्मीर में जमात ए इस्लामी सहित आतंकियों के मददगारों के यहां छापे पड़ रहे हैं। अब तक की जांच में यह भी सामने आया है कि धमाके में इस्तेमाल कार 29 अक्टूबर से 10 नवंबर तक फरीदाबाद के अल फलाह अस्पताल में थी।
लाल किले के पास 10 नवंबर को कार में हुआ विस्फोट। तस्वीर-PTI
मुजम्मिल-उमर ने कई बार की लाल किले की रेकी
बताया जाता है कि पुलिस की छापेमारी और अपनी साथियों की गिरफ्तारी से उमर घबरा गया और आई-20 कार को 10 नवंबर को अस्पताल से निकाला। सूत्रों का कहना है कि उमर यह कार लेकर कनॉट प्लेस फिर मयूर विहार लेकर गया। फिर उसने चांदनी चौक मस्जिद पार्किंग में कार पार्क की। जांच में यह भी सामा आया है कि मुजम्मल और उमर ने लाल किले की कई बार रेकी की थी। लाल किला आतंकियों के निशाने पर था।
जांच आगे बढ़ने के साथ हो रहे चौंकाने वाले नए खुलासे
दिल्ली धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसमें नए खुलासे हो रहे हैं और धमाके के तार कई अन्य शहरों से जुड़ रहे हैं। अब दिल्ली धमाके की जांच आगरा तक पहुंच गई है। खुफिया एजेंसियों ने SN मेडिकल कॉलेज आगरा से MD करने वाले डॉ. परवेज अंसारी को लखनऊ से हिरासत में लिया है। सूत्रों के अनुसार डॉ. परवेज की बहन डॉ. शाहीन धमाके की संदिग्ध बताई जा रही है। बताया जा रहा है धमाका अल-फलाह यूनिवर्सिटी फरीदाबाद के जैश से जुड़े डॉ. उमर मोहम्मद ने किया था।
डीएनए जांच के लिए उमर के परिजनों को बुलाया
लाल किले के मेट्रो गेट नंबर एक के पास सोमवार शाम आई-20 कार में विस्फोट हुआ। समझा जाता है कि इस धमाके में उमर की मौके पर मौत हो गई। कार के अंदर से उसके शरीर के टुकड़े बरामद हुए। DNA जांच के लिए उमर के परिजनों को जम्मू से बुलाया गया है। जांच एजेंसियों ने अब अल फलाह यूनिवर्सिटी के डॉ. मुजम्मिल और डॉ. शाहीन को भी संदेह के घेरे में लिया है।
आगरा के पुराने रिकॉर्ड खंगालेंगी एजेंसियां
सूत्रों का कहना है, डॉ. परवेज ने 2015 में SN मेडिकल कॉलेज आगरा से MD की थी और 2016 तक सीनियर रेजिडेंट के तौर पर कार्य किया था। अब एजेंसियां एसएन मेडिकल कॉलेज आगरा के पुराने रिकॉर्ड खंगालेंगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि डॉ. परवेज का आगरा से अब भी कोई संपर्क था या नहीं।
