Danish Manzoor Bhat : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी पत्रिका न्यूजवीक को दिए अपने हालिया इंटरव्यू में वैश्विक ताकत के रूप में उभरे भारत और चीन के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाने के प्रयासों को रेखांकित किया है। पत्रिका के एडिटोरियल डाइरेक्टर दानिश मंजूर भट्ट के साथ खास बातचीत में प्रधानमंत्री ने आर्थिक विकास, बुनियादी संरचना के विस्तार, पर्यावरण के मुद्दे सहित भारत के विकास के अलग-अलग पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। हालांकि, इस इंटरव्यू के बाद दानिश आलोचना का शिकार हुए हैं और उन्हें ट्रोल किया जा रहा है। दानिश ने अब अपने आलोचकों और ट्रोल करने वालों को जवाब दिया है। उन्होंने सवाल करने वालों से इंटरव्यू का पूरा हिस्सा पढ़ने के लिए कहा है।
पीएम मोदी ने न्यूजवीक पत्रिका को दिया है इंटरव्यू।
X पर दानिश ने कहा कि वह आलोचनाओं का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह धारणा बनाकर चलते हैं कि विकासशील देश में कुछ अच्छा नहीं हो सकता लेकिन इस पूर्वाग्रह को छोड़ते हुए भारत की कहानी बताए जाने की जरूरत है क्योंकि देश अपनी राजनीति और अपने राजनेताओं से अलग चीज होते हैं।
'भारत की पहचान केवल राजनीति नहीं'
दानिश कहते हैं कि अपने इस इंटरव्यू में उन्होंने भारतीय पीएम को एक परिपक्व नेता पाया। इस नेता को पता है कि वह क्या कर रहे हैं। इन्हें अपनी कमजोरियां पता हैं। देश को समृद्धि और विकास के रास्ते पर ले जाने के लिए ये अपनी खामियों को दूर करने का प्रयास भी कर रहे हैं। गलत को गलत कहने से आपको गुरेज नहीं होना चाहिए, लेकिन जो अच्छाइयां हैं उसे भी आपको सामने लाना चाहिए। भारत आज तेजी से विकास कर रहा है लेकिन दुनिया आज भी इसे 'सपेरों के देश' के रूप में देखती है, लेकिन भारत अपनी राजनीति, अपने प्रधानमंत्रियों एवं अपने घरेलू अंतर्विरोधों से अलग एक देश भी है।
इंदिरा के बाद न्यूजवीक के कवर पर छपने वाले दूसरे भारतीय PM
पीएम मोदी पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के बाद न्यूजवीक के कवर पर आने वाले पहले भारतीय पीएम हैं। इस इंटरव्यू में पीएम ने कहा, 'लोगों को यह भरोसा है कि अगर योजनाओं का लाभ किसी और को मिला है तो उन तक भी पहुंचेगा। लोगों ने देखा है कि भारत 11वीं से पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। अब देश की आकांक्षा है कि तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बने।'
इंटरव्यू में राम मंदिर पर बोले
इंटरव्यू में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण पर प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रीराम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह राष्ट्र के लिए एकता का एक ऐतिहासिक क्षण था और यह सदियों की दृढ़ता और बलिदान की परिणति थी। उन्होंने कहा, 'जब मुझे समारोह का हिस्सा बनने के लिये कहा गया तो मुझे पता था कि मैं देश के 1.4 अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करूंगा जिन्होंने रामलला की वापसी के लिए सदियों से धैर्यपूर्वक इंतजार किया है।'
