राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सहयोगी दल कुकी पीपुल्स अलायंस (KPA) ने मणिपुर में एन बिरेन सिंह सरकार से समर्थन वापस लेने की रविवार को घोषणा की।राज्यपाल अनुसुइया उइके को लिखे एक पत्र में केपीए प्रमुख तोंगमांग हाओकिप ने मणिपुर में भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार से संबंध तोड़ने के पार्टी (केपीए के) फैसले की सूचना दी है।
इस घटनाक्रम से सरकार की स्थिरता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा
इस घटनाक्रम से सरकार की स्थिरता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि 60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में भाजपा के 37 सदस्य हैं। बीते तीन महीनों में राज्य में जातीय हिंसा में 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हाओकिप ने पत्र में कहा है, 'मौजूदा स्थिति पर सावधानीपूर्वक विचार-विमर्श करने के बाद, मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह नीत मणिपुर सरकार के लिए समर्थन जारी रखने का कोई मतलब नहीं रह गया है।'
उन्होंने पत्र में कहा है, 'इसलिए, मणिपुर सरकार से केपीए अपना समर्थन वापस लेता है।' विधानसभा में केपीए के दो विधायक--सैकुल से के.एच. हांगशिंग और सिंघट से चिनलुंगथांग--हैं।एनपीपी के सात और एनपीएफ के पांच विधायक हैं। कांग्रेस के भी पांच विधायक हैं।
केपीए के महासचिव वी ललाम हांगशिंग ने कहा, 'हमने ईमेल के जरिये राज्यपाल को पत्र भेजा है। हमारे दो विधायक हैं और हम सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे थे। मौजूदा स्थिति के मद्देनजर समर्थन जारी रखने का कोई मतलब नहीं रह गया है।'
