जेल से बाहर रहेगी सोनम रघुवंशी, मेघालय HC ने जमानत बरकरार रखी, दस्तावेजों में त्रुटि होने की बात कही

अदालत ने पाया कि गिरफ्तारी से जुड़े सभी दस्तावेज गिरफ्तारी मेमो, औचित्य (जस्टिफिकेशन) चेकलिस्ट, निरीक्षण मेमो और केस डायरी के अंश में हत्या से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) के बजाय गलती से धारा 403(1) का उल्लेख किया गया था।

Sonam Raghuvanshi : मेघालय उच्च न्यायालय ने पूर्वोत्तर राज्य में हनीमून के दौरान अपने पति की कथित हत्या के मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत को बरकरार रखा। न्यायमूर्ति डब्ल्यू. डिएंगदोह की एकल पीठ ने राज्य सरकार की उस आपराधिक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें 27 अप्रैल को निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत रद्द करने का अनुरोध किया था।

Sonam Raghuvanshi

अभी जमानत पर बाहर है सोनम रघुवंशी।

न्यायमूर्ति डिएंगदोह ने दलीलों को नहीं माना

न्यायमूर्ति डिएंगदोह ने कहा कि गिरफ्तारी का आधार तैयार करने का तरीका 'न्यायिक विवेक के पूर्ण अभाव’को दर्शाता है। अदालत ने कहा, 'यह स्पष्ट है कि गिरफ्तारी के आधार बिना किसी सोच-विचार के तैयार किया गया... इसमें कहीं भी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आरोपी के खिलाफ वास्तविक आरोप या विशिष्ट जानकारी क्या है।’ इसने राज्य सरकार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि जमानत रद्द करने के लिए अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल करने का कोई आधार नहीं बनता है।

End of Feed