भारत का मराठा मिलिट्री लैंडस्केप, यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हो गया है। यह निर्णय पेरिस में चल रहे विश्व धरोहर समिति (डब्ल्यूएचसी) के 47वें सत्र के दौरान लिया गया। यूनेस्को दर्जा के लिए नामांकन 2024-25 सत्र के लिए किया गया था। यूनेस्को ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में नया नाम: भारत में मराठों के किले।’’
भारत का मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स विश्व धरोहर सूची में शामिल (फोटो- PIB)
क्या है मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स
मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स उस भौगोलिक और सामरिक नेटवर्क को कहते हैं जो मराठा साम्राज्य की सैन्य ताकत और रणनीति की रीढ़ थे। ये स्थान किलों, पहाड़ियों, नदियों और घने जंगलों से सुसज्जित थे, जिनका उन्होंने युद्ध और रक्षा दोनों के लिए कुशलतापूर्वक उपयोग किया। इनके कारण मराठाओं को कई बार बड़ी सेनाओं का सामना करने में सफलता मिली और वे भारतीय इतिहास के महान सैन्य रणनीतिज्ञों में गिने गए।
कहां से कहां तक है मराठा मिलिट्री लैंडस्केप
भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य में बारह प्रमुख घटक भाग शामिल हैं, जो महाराष्ट्र और तमिलनाडु के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में फैले हुए हैं। इनमें महाराष्ट्र के सालहेर किला, शिवनेरी किला, लोहागढ़, खंडेरी किला, रायगढ़, राजगढ़, प्रतापगढ़, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला किला, विजय दुर्ग, सिंधुदुर्ग तथा तमिलनाडु का जिंजी किला शामिल है। ये किले विभिन्न भौगोलिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों में स्थित हैं और मराठा शासन की सैन्य रणनीतियों तथा किलेबंदी की क्षमता को दर्शाते हैं।
चयनित किलों का महत्व और संरक्षण
महाराष्ट्र में 390 से अधिक किलों के बीच से केवल 12 किलों को मराठा सैन्य परिदृश्य का हिस्सा चुना गया है। इनमें से आठ किले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) द्वारा संरक्षित हैं:
- शिवनेरी किला
- लोहगढ़
- रायगढ़
- सुवर्णदुर्ग
- पन्हाला किला
- विजयदुर्ग
- सिंधुदुर्ग
- जिंजी किला
बाकी चार किले—सालहेर किला, राजगढ़, खंडेरी किला और प्रतापगढ़—महाराष्ट्र सरकार के पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय द्वारा संरक्षित हैं।
