Manipur Violence Latest Update in Hindi: मणिपुर के चुराचांदपुर में शुक्रवार (पांच मई, 2023) को सीआरपीएफ के एक कोबरा कमांडो की हत्या कर दी गई। यह घटना दोपहर के वक्त की है, जब 204वीं कोबरा बटालियन के डेल्टा कंपनी के कांस्टेबल चोनखोलेन हाओकिप पर हमला हुआ था। फिलहाल यह साफ नहीं है कि किन परिस्थितियों में उनकी हत्या की गई लेकिन बताया गया कि पुलिस की वर्दी पहने कुछ हमलावर उनके गांव में घुसे और उनकी हत्या कर दी।
मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा है कि यह हिंसा समाज में ‘गलतफहमी’ का नतीजा थी। (फोटोः IANS/ANI)
अफसरों ने इस बारे में समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि वह इस दौरान छुट्टी पर अपने गांव आए हुए थे, तभी उन्हें गोली मार दी गई। इस बीच, आयकर विभाग के कर्मियों की अखिल भारतीय संस्था भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) एसोसिएशन की ओर से जानकारी दी गई कि हिंसा के दौरान इंफाल में तैनात आयकर विभाग के एक अधिकारी को आधिकारिक आवास से पहले ‘‘बाहर घसीटा’’ गया और फिर उनकी हत्या कर दी गई।
एसोसिएशन की ओर से इस घटना को लेकर ट्वीट में ‘‘इंफाल में हिंसा के कायरतापूर्ण कृत्य और उसमें आयकर सहायक लेतमिनथांग हाओकिप की मौत’’ की कड़ी निंदा की। लिखा गया, ‘‘ड्यूटी पर निर्दोष जन सेवक की हत्या को कोई वजह या विचारधारा न्यायोचित नहीं ठहरा सकती। मुश्किल की इस घड़ी में उनके परिवार के प्रति हमारी संवेदनाएं हैं।’’
संघ ने हाओकिप की तस्वीर शेयर करते हुए आगे लिखा कि ‘‘उन्हें मेइती बदमाशों ने इंफाल में उनके आधिकारिक आवास से बाहर घसीटा और पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी।’’ ये खबरें तब आईं, जब नॉर्थ ईस्ट का यह सूबा पिछले 48 घंटे से जातीय संघर्ष का सामना कर रहा है। पीटीआई को अधिकारियों की ओर से आगे बताया गया कि मणिपुर के हिंसा प्रभावित इलाकों से कम से कम 30 लोगों ने शुक्रवार को भागकर मिजोरम में शरण ली, जिनमें अधिकतर महिलाएं और बच्चे हैं।
दरअसल, मणिपुर में बहुसंख्यक मेइती समुदाय की ओर से उसे अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में ‘ऑल ट्राइबल स्टूडेंट यूनियन मणिपुर’ (एटीएसयूएम) की ओर से बुधवार (तीन मई, 2023) को हुए ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के दौरान चुराचांदपुर जिले के तोरबंग क्षेत्र में हिंसा भड़क गई थी। नगा और कुकी सहित बाकी आदिवासी समुदायों की ओर से इस मार्च का आयोजन मणिपुर उच्च न्यायालय की ओर से पिछले महीने राज्य सरकार को मेइती समुदाय की एसटी दर्जे की मांग पर चार सप्ताह के भीतर केंद्र को एक सिफारिश भेजने का निर्देश देने के बाद किया गया था। (भाषा इनपुट्स के साथ)
