Kalyan Banerjee: पार्टी में बगावत के बीच अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर सूचित किया कि कल्याण बनर्जी को तत्काल प्रभाव से अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) नियुक्त कर दिया गया है। पत्र में उन्होंने अनुरोध किया कि इस जानकारी को रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए। ममता के कदम से अब कयास लग रहे हैं कि क्या इस मामले में कोई नया ट्विस्ट आएगा। क्योंकि एक दिन पहले ही टीएमसी के बागी सांसदों ने दावा किया है कि उन्होंने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर एनडीए का हिस्सा बनने की मंशा जताई है।
कल्याण बनर्जी को अहम जिम्मेदारी
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कल्याण बनर्जी ने की पत्र सार्वजनिक करने की मांग
वहीं, आज टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि काकोली घोष की वो चिट्ठी जो स्पीकर को लिखी गई, वो अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। 24 घंटे बाद भी नहीं हुई है। लोकसभा स्पीकर के ऑफिस का भी कहना है कि अभी तक कोई चिट्ठी नहीं आई है। जिस तरह से वो लोग भूपेंद्र यादव के घर गए..किसने मिलाया, कैसे मिलाया ये सब पता नहीं, लेकिन अब उनके नेता नरेंद्र मोदी हो गए हैं, ममता बनर्जी नहीं रहीं। उनके पास 20-21-22-23 जितने भी सांसद हों, उन्हें अगर 10th शेड्यूल के तहत अयोग्य होने से बचना है तो बीजेपी में शामिल होना ही होगा।
आजाद का सवाल- गद्दारों से पूछना चाहूंगा...
वहीं, टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने बागियों को निशाने पर लिया। आजाद ने कहा- इन गद्दारों से पूछना चाहूंगा कि अगर आपको दिक्कत थी तो अपने चुनाव के पहले पार्टी क्यों नहीं छोड़ी, चुनाव के बाद क्यों छोड़ी? रिजाइन करो और बीजेपी से टिकट लेकर चुनाव लड़ो। एनडीए एक गठजोड़ है कोई पार्टी नहीं। आपके पास दो तिहाई बहुमत नहीं है..आप डर है कि पार्टी से आपको निकाल दिए जाएगा। अब जब बीजेपी के गुंडे तुम्हारे कार्यकर्ता को मारेंगे तो क्या करोगे। जो 5 लाख का ब्राइब लेता हुआ देखा गया..उस उधार के सिन्दूर को तुमने अपनी मांग में लगा लिया। तुम में जरा भी गैरत है तो बोलो। जब तुम्हारे कार्यकर्ता मार खाएंगे, तो हम जाएंगे लड़ने। 32 लाख वोट से सिर्फ हमें हराया गया..हम हारे नहीं। 29 के अंदर बीजेपी साफ हो जाएगी..केंद्र और राज्य दोनों जगहों से। काकोली और शर्मिला बताएं तुम्हारे साथ क्या गलत हुआ? तुम मूंग और मसूर की दाल। 5 बार चुनाव हारी, दीदी ने तुम्हे जिताया। तुम संसद नहीं आती..तो तुम्हें चीफ व्हिप से हटाया गया। बताओ तुम्हारी पार्टी क्या है? कभी तृणमूल का नाम नहीं लेना। जब शेरनी घायल होती है तो ज्यादा खतरनाक होती है। ये पार्टी विरासत में नहीं मिली है।
लोकसभा में मुख्य सचेतक के क्या-क्या कार्य?
लोकसभा में मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) का मुख्य कार्य अपनी पार्टी के सदस्यों के बीच अनुशासन बनाए रखना, उनकी सदन में उपस्थिति सुनिश्चित करना और पार्टी के निर्देशों (व्हिप) के अनुसार मतदान करवाना होता है। वे सदन में पार्टी के प्रबंधन और सुचारू कामकाज के लिए जिम्मेदार होते हैं।
पार्टी अनुशासन और निर्देश (व्हिप)
मुख्य सचेतक का सबसे महत्वपूर्ण कार्य यह देखना है कि पार्टी के सभी सांसद पार्टी की नीतियों और इच्छाओं का पालन करें। महत्वपूर्ण मौकों पर, जैसे कि मतदान या किसी विधेयक पर चर्चा के दौरान, वे पार्टी की ओर से निर्देश जारी करते हैं, जिसे 'व्हिप' कहा जाता है।
उपस्थिति सुनिश्चित करना
वे यह सुनिश्चित करते हैं कि सदन की कार्यवाही के दौरान पार्टी के सांसद भारी संख्या में उपस्थित रहें, विशेष रूप से तब जब सरकार के लिए बहुमत साबित करना या कोई प्रस्ताव पारित करना आवश्यक हो।
वक्ताओं की सूची तैयार करना
जब लोकसभा में किसी विधेयक या विषय पर बहस होती है, तो मुख्य सचेतक ही अपनी पार्टी के उन वक्ताओं की सूची तैयार करते हैं जिन्हें बोलना होता है और इस सूची को लोकसभा अध्यक्ष को सौंपते हैं।
कल्याण बनर्जी को चीफ व्हिप क्यों बनाया?
एक तरह से ममता ने कल्याण बनर्जी को चीफ व्हिप बनाकर आने वाले संकट से निपटने की तैयारी की है। कल्याण बनर्जी, ममता बनर्जी के बेहद करीबी और खास नेता हैं। चीफ व्हिप की हैसियत से वह बागी गुट के सामने बड़ी बाधा बन सकते हैं। वह स्पीकर से इन बागियों के खिलाफ एक्शन लेने को कह सकते हैं। इसके अलावा चीफ व्हिप की हैसियत से उनके पास सांसदों को निर्देशित करने की शक्ति होगी। कल्याण बनर्जी के हाथों में ये अधिकार आने के बाद वह पार्टी लाइन से हटकर काम करने वाले सांसदों पर किसी भी तरह की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
