महाराष्ट्र तो महज़ ट्रेलर! मिशन 2024 के लिए इन सूबों पर है BJP की पैनी नज़र

  • Compiled by: अभिषेक गुप्ता
  • Updated Jul 3, 2023, 10:16 PM IST

Loksabha Polls 2024: दरअसल, सूबे में बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तहत एनसीपी के सीनियर नेता अजित पवार ने रविवार को एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार में उपमुख्यमंत्री पद की, जबकि पार्टी के आठ अन्य नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली।

Loksabha Polls 2024: दक्षिण भारत के कर्नाटक में करारी हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सुपर एक्टिव मोड में है। आने वाले इलेक्शंस (पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव 2024) को लेकर वह किसी प्रकार की चूक नहीं करना चाहती है। यही वजह है कि विपक्षी एकता की पुरजोर कोशिशों के बीच वह फूंक-फूंक कर अपने कदम बढ़ा रही है। रविवार (तीन जुलाई, 2023) को इसी कड़ी में भाजपा ने विपक्षी एकता को तगड़ा झटका देते हुए शरद पवार की एनसीपी की असल क्रीम को झपट लिया। हालांकि, महाराष्ट्र में हुए सियासी उलटफेर (शरद पवार के भतीजे अजित पवार की ओर से) महज एक ट्रेलर था, क्योंकि बीजेपी का ध्यान इस संदर्भ में पूरी पिक्चर बनाने से है। यही वजह है कि उसकी कुछ सूबों पर पैनी निगाह है। आइए, जानते हैं क्यों:

BJP Mission 2024

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (क्रिएटिवः अभिषेक गुप्ता)

दिल्ली से सटे हरियाणा में राज्य इकाई और सहयोगी जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) के बीच तनावपूर्ण रिश्ते के मद्देनजर भाजपा ने हाल ही में किसी भी संभावना की तैयारी के लिए निर्दलीय विधायकों से समर्थन मांगा था। वैसे, यह उस राज्य में पर्याप्त नहीं हो सकता, जहां बीजेपी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें दो बार की सत्ता विरोधी लहर, कृषि विरोध प्रदर्शन पर गुस्सा और भाजपा सांसद के खिलाफ पहलवानों का हालिया विरोध भी शामिल है। सूत्रों ने इस बाबत एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य के नेताओं से जेजेपी के साथ रिश्ते सुधारने को कहा है।

वहीं, पंजाब की बात करें तो वहां भाजपा और पूर्व सहयोगी शिरोमणि अकाली दल करीब आ रहे हैं। हालांकि, मोदी सरकार की ओर से समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर जोर देने से मामला बिगड़ सकता है। अकाली दल साफ कर चुका है कि वह इस तरह की चीज को स्वीकार नहीं करेगा। पार्टी प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि यूसीसी का "अल्पसंख्यक और आदिवासी समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव" पड़ेगा।

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