पश्चिम बंगाल में मास्टर ऑफ फिलॉसफी (एमफिल) की पढ़ाई को लेकर सियासी संग्राम देखने को मिला है। सूबे की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार की ओर से साफ किया गया है कि वह इस बाबत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के आदेश को नहीं मानेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि उनकी अपनी नीतिया हैं।
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल)
शुक्रवार (29 दिसंबर, 2023) को ये बातें राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा ने बताया कि उनकी सरकार यूजीसी के उस फैसले का पालन नहीं करेगी, जिसमें उसने विश्वविद्यालयों को 2023-24 शैक्षणिक वर्ष के लिए एमफिल पाठ्यक्रम में प्रवेश रोकने को कहा है।
बसु से एक रोज पहले बृहस्पतिवार (28 दिसंबर, 2023) को एक कार्यक्रम से इतर मीडियाकर्मियों ने जब पूछा कि क्या पश्चिम बंगाल सरकार यूजीसी के फैसले का पालन करेगी? इस पर उन्होंने कहा, ‘‘हम यूजीसी के आदेश का पालन नहीं करेंगे।’’
वह आगे बोले कि राज्य का उच्च शिक्षा विभाग शिक्षाविदों की विशेषज्ञ समिति द्वारा तय किए गए दिशा-निर्देशों का ही पालन करेगा। बसु ने कहा कि एमफिल पाठ्यक्रम राज्य के विश्वविद्यालय में संचालित किया जाता रहेगा। उन्होंने कहा, “राज्य विश्वविद्यालयों में एमफिल पाठ्यक्रमों के संबंध में राज्य की अपनी नीतियां हैं और उन्हें बदलने का कोई कारण नहीं है।”
दरअसल, यूजीसी सचिव मनीष जोशी ने 27 दिसंबर को कहा था, ‘‘यूजीसी के संज्ञान में आया है कि कुछ विश्वविद्यालय एमफिल (मास्टर ऑफ फिलॉसफी) पाठ्यक्रमों के लिए नए आवेदन आमंत्रित कर रहे हैं। इस संबंध में, सभी के ध्यान में लाया जा रहा है कि एमफिल मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं है।”
उनके मुताबिक, ‘‘यूजीसी (पीएचडी डिग्री के लिए न्यूनतम अर्हता एवं प्रक्रिया) नियमावली, 2022 का नियम 14 स्पष्ट रूप से कहता है कि उच्च शिक्षण संस्थान एमफिल पाठ्यक्रम में प्रवेश की कोई पेशकश नहीं करेंगे।’’ नवंबर 2022 में यूजीसी ने एमफिल पाठ्यक्रम बंद कर दिया था। यूजीसी ने छात्रों को किसी भी एमफिल पाठ्यक्रम में दाखिला न लेने की भी सलाह दी है।
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