गुरुवार को भी लोकसभा में हंगामे का दौर नजर आया। प्रश्नकाल के दौरान उस समय हंगामा मचा जब विपक्षी सदस्यों ने भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते का विरोध किया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने नारे लगाने शुरू कर दिए और तख्तियां भी दिखाईं। कई सदस्य कुछ मुद्दों को उठाने के लिए सदन के वेल में चले गए। उनमें से कुछ सांसदों को "व्यापार समझौता वापस लो" के नारे लगाते हुए सुना गया। एक तख्ती पर नए श्रम संहिता को वापस लेने की मांग की गई थी।
लोकसभा में आज भी हंगामा
सदन के अंदर तख्तियां दिखाना नियमों के विरुद्ध
अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद टेनेटी ने उन्हें अपने मुद्दे उठाने नहीं दिए और विरोध कर रहे सदस्यों से अपनी सीटों पर वापस जाने का अनुरोध किया। उन्होंने बार-बार कहा कि सदन के अंदर तख्तियां दिखाना संसद के नियमों के विरुद्ध है और सदस्यों से तख्तियां नीचे रखने का आग्रह किया। हंगामा जारी रहने पर कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर हंगामा
लगभग सात मिनट तक चले प्रश्नकाल के दौरान एक प्रश्न और उसके पूरक प्रश्न लिए गए। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते में सरकार द्वारा दी गई विभिन्न रियायतों, जिनमें कृषि क्षेत्र से संबंधित रियायतें भी शामिल हैं, पर चिंता जताई है। इससे पहले लोकसभा में बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार को सरकार को भारत-यूएस ट्रेड डील पर घेरा। राहुल गांधी ने कहा कि किसानों के हितों के साथ समझौता किया गया और देश को बेच दिया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बराबरी की बात करनी चाहिए थी।
राहुल गांधी ने उठाया किसानों का मुद्दा
आज राहुल गांधी ने चार श्रम संहिताओं का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि मजदूरों और किसानों के भविष्य को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मजदूरों और किसानों की सुनेंगे या उन पर किसी "ग्रिप" की पकड़ बहुत मजबूत है? राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट किया, आज देश भर में लाखों मजदूर और किसान अपने हक की आवाज बुलंद करने के लिए सड़कों पर हैं। मजदूरों को डर है कि चार श्रम संहिताएं उनके अधिकारों को कमजोर कर देंगी। किसानों को आशंका है कि (अमेरिका के साथ किया गया) व्यापार समझौता उनकी आजीविका पर चोट करेगा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, मनरेगा को कमजोर या खत्म करने से गांवों का आखिरी सहारा भी छिन सकता है। जब उनके (मजदूरों और किसानों के) भविष्य से जुड़े फैसले लिए गए, तब उनकी आवाज को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने सवाल किया कि क्या मोदी जी अब सुनेंगे या उन पर किसी "ग्रिप" की पकड़ बहुत मजबूत है? राहुल गांधी ने कहा कि मैं मजदूरों और किसानों के मुद्दों और उनके संघर्ष के साथ मजबूती से खड़ा हूं।
