भारतीय वायुसेना के लिए एक ऐतिहासिक दिन रहा, जब स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान तेजस MK1-A ने शुक्रवार को अपनी पहली सफल उड़ान भरी। यह अत्याधुनिक विमान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने विकसिक किया है। लंबे समय से इंतजार की जा रहे इस खास उपल्ब्धि ने देश की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत किया है, साथ ही स्वदेशी तकनीक पर भरोसे को भी नई ऊंचाई दी है।
उड़ान भरता तेजस (ANI)
रक्षा मंत्री की मौजूदगी में ऐतिहासिक उड़ान
तेजस MK1-A की पहली उड़ान महाराष्ट्र के नासिक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में हुई। उड़ान पूरी होने के बाद विमान को वॉटर कैनन से सलामी दी गई। लंबे समय से भारतीय वायुसेना इस स्वदेशी लड़ाकू विमान का इंतजार कर रही थी।
नाल एयरबेस पर हो सकती है तैनाती
तेजस MK1-A को बीकानेर स्थित नाल एयरबेस पर पाकिस्तान सीमा के समीप तैनात किया जा सकता है। यह विमान आधुनिक एवियोनिक्स, बेहतर हथियार क्षमता, और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से लैस है। यह वायुसेना के पुराने मिग-21 विमानों की जगह लेगा।
किन हथियारों से होगा लैस
गौरतलब है कि वायुसेना ने 26 सितंबर 2024 को अपने मिग-21 बेड़े को सेवानिवृत्त किया था। जिसके बाद तेजस MK1-A को मिग की जगह लाया जाएगा। तेजस का यह अपग्रेडेड वेरिएंट ब्रह्मोस जैसे स्वदेशी हथियारों से लैस किया जाएगा। इसकी अधिकतम रफ्तार 2200 किमी प्रति घंटे से अधिक है और इसमें अपग्रेडेड रडार और एवियोनिक्स सिस्टम लगाए गए हैं।
62 हजार करोड़ का करार
भारतीय वायुसेना को मजबूत बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने HAL के साथ 62,370 करोड़ रुपए का करार किया है। इस अनुबंध के तहत 97 स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस MK1-A बनाए जाएंगे, जिनमें 68 सिंगल-सीटर और 29 ट्विन-सीटर ट्रेनर विमान शामिल हैं। तेजस MK1-A के निर्माण में 65 प्रतिशत से अधिक उपकरण स्वदेशी हैं। इस परियोजना में कई भारतीय कंपनियों ने सहयोग किया है। यह भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई प्रदान करता है।
HAL को मिल रहे हैं GE-404 इंजन
HAL को अमेरिकी कंपनी GE से अब तक चार GE-404 जेट इंजन मिल चुके हैं, जिन्हें तेजस MK1-A में लगाया जाएगा। इस वित्त वर्ष के अंत तक कुल 12 इंजन मिलने की उम्मीद है। इंजन सप्लाई चेन में सुधार से उत्पादन और डिलीवरी प्रक्रिया तेज होगी।
वायुसेना की ताकत में होगा इजाफा
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, तेजस MK1-A का शामिल होना भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता और स्वदेशी निर्भरता को और बढ़ाएगा। आने वाले वर्षों में इन विमानों की क्रमिक डिलीवरी से भारत की वायु शक्ति में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी।
