सीबीआई की एक टीम ने नौकरी के बदले जमीन घोटाला मामले की जांच के सिलसिले में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी नेता राबड़ी देवी (Rabri Devi) से पूछताछ करने सोमवार को उनके आवास पहुंची। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राबड़ी देवी ने मीडिया से कहा कि यह कुछ भी नहीं है। शुरुआत से ही ऐसा ही रहा है। दूसरी ओर सीबीआई अधिकारियों ने कहा कि राबड़ी देवी के घर पर कोई तलाशी नहीं हुई या कोई छापा नहीं मारा जा रहा।
बिहार से पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के घर सीबीआई पहुंची
#WATCH | Patna: Former Bihar CM Rabri Devi says, "This is nothing. This has been the case since the beginning...,"… t.co/qRYCSvOFvs
— ANI (@ANI) Mar 6, 2023
लालू और परिवार को 15 मार्च को कोर्ट में पेस होने का समन
सीबीआई इस मामले में पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और विशेष अदालत ने पूर्व रेलवे मंत्री लालू प्रसाद और उनके परिवार के सदस्य तथा अन्य लोगों को 15 मार्च को कोर्ट में पेश होने के लिए समन भेजा है। एजेंसी कथित घोटाला मामले में जांच कर रही है। सीबीआई की टीम मामले में आगे की जांच के सिलसिले में ही पूर्व सीएम राबड़ी देवी से पूछताछ कर रही है। सीबीआई लालू प्रसाद के परिवार से इस मामले में कुछ और दस्तावेज भी मांग सकता है।
जब लालू रेल मंत्री थे तब जमीन के बदले रेलवे में नौकरी दी?
यह मामला लालू प्रसाद के परिवार को गिफ्ट में जमीन दे कर या जमीन बेचने के बदले में रेलवे में कथित तौर पर नौकरी दिए जाने से जुड़ा है। यह मामला तब का है जब लालू 2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री थे। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों को मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में स्थित रेलवे के विभिन्न जोन में 2004-2009 के दौरान ग्रुप-डी पदों पर नियुक्त किया गया और इसके बदले में उन लोगों ने या उनके परिवार के सदस्यों ने लालू और एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के नाम पर अपनी जमीन दी। बाद में इस कंपनी का स्वामित्व लालू के परिवार के सदस्यों ने अपने हाथ में ले लिया था।
लालू परिवार ने नौकरी के बदले 1,05,292 वर्ग ली फुट जमीन
यह भी आरोप लगाया गया है कि पटना में लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों ने 5 बिक्री सौदों, दो गिफ्ट सौदों के जरिये से 105292 वर्ग फुट जमीन लोगों से ली। इसके लिए विक्रेताओं को नगद भुगतान करने को कहा गया। इस जमीन की कीमत वर्तमान सर्किल रेट के अनुसार 4.32 करोड़ रुपए है लेकिन लालू प्रसाद के परिवार को यह जमीन इससे बहुत कम दाम में बेची गई। साथ ही आरोप है कि नियुक्तियों के लिए रेलवे प्राधिकरण की ओर से जारी दिशानिर्देशों और आवश्यक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर कथित लाभार्थियों की सेवाएं नियमित की गईं। (एजेंसी इनपुट के साथ)
