Kiren Rijiju On Judiciary:सुप्रीम कोर्ट में न्यायधीशों की नियुक्ति के लिए बने कॉलेजियम सिस्टम को लेकर केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू के बयान खासा चर्चा में हैं। वह लगातार इस प्रक्रिया में बदलाव की बात उठा रहे हैं। उन्होंने सोमवार को यहां तक कह दिया कि न्यायधीशों को चुनाव का सामना नहीं करना पड़ता है। लेकिन आज के दौर में आप कुछ छिपा नहीं सकते हैं। रिजिजू के इस बयान के बाद ऐसा लग रहा था, कि आने वाले दिनों में वह कॉलेजियम सिस्टम पर और तीखा हमला कर सकते हैं। लेकिन सोमवार को ही उन्होंने एक बयान देते हुए कहा है कि
कॉलेजियम सिस्टम में सरकार चाहती है बदलाव
न्यायपालिका और केंद्र में कभी-कभी मतभेद हो जाते हैं। इसका यह मतलब नहीं है कि न्यायपालिका और केंद्र के बीच महाभारत चल रही है।
रिजिजू ने क्या कहा
सोमवार को केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि बहस और तर्क-वितर्क न हों तो लोकतंत्र का क्या उद्देश्य है? लेकिन कुछ लोग यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि न्यायपालिका और केंद्र के बीच महाभारत चल रही है, लेकिन ये सच नहीं है। हमारे बीच कोई समस्या नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि हम (न्यायपालिका और सरकार के सदस्य) लगातार किसी न किसी तरह से दैनिक आधार पर मिलते हैं। सभी बड़े और छोटे मुद्दों पर भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के साथ वह संपर्क में हैं। रिजिजू ने यह भी कहा कि बीजेपी में ये कहा जाता है कि मतभेद हो सकता है, लेकिन मनभेद नहीं।
मुख्य न्यायाधीश को लिखा था पत्र
इसके पहले 6 जनवरी को मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र का जिक्र करते हुए, रिजिजू ने कहा कि मैंने उन्हें एक पत्र लिखा, जिसके बारे में किसी को नहीं पता था। पता नहीं किसे कहां से पता चला और खबर बना दी कि कानून मंत्री ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा कि कॉलेजियम में सरकार का प्रतिनिधि होना चाहिए। इस बात का कोई सिर पैर नहीं, मैं कहां से उस प्रणाली में एक व्यक्ति को शामिल कर दूंगा।
