Karnataka Hijab Row : कर्नाटक में हिजाब के मुद्दे को लेकर एक बार फिर सियासत तेज होती नजर आ रही है। जहां एक ओर एमनेस्टी इंडिया ने कर्नाटक की नई सरकार से हिजाब बैन वापस लेने की मांग की थी तो वहीं, अब राज्य सरकार ने इस पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। कर्नाटक के मंत्री डॉ. जी परमेश्वर ने बुधवार को एएनआई से कहा कि हम देखेंगे कि भविष्य में क्या बेहतर कर सकते हैं, लेकिन अभी हमें कर्नाटक के लोगों से की गई पांच गारंटियों के वादे को पूरा करना है। पिछले वर्ष तत्कालीन भाजपा सरकार के फैसले के बाद से ही हिजाब के मुद्दे पर सियासत गर्मा गई थी और स्कूल कॉलेजों में ड्रेस कोड लागू कर दिया गया था। इस मुद्दे पर फैसले को हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा था।
कनार्टक में हिजाब बैन का मुद्दा फिर गर्माया।
कांग्रेस विधायक ने बैन हटाने कही थी बात
लगभग एक हफ्ते पहले कर्नाटक में कांग्रेस की मुस्लिम विधायक कनीज फातिमा ने स्कूलों में हिजाब से बैन हटाने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि, कर्नाटक के स्कूलों में जल्द ही कांग्रेस हिजाब से बैन हटाएगी और बच्चियों को वापस स्कूल बुलाएगी ताकि वे आराम से परीक्षा दे सकें। गौरतलब है कि, कनार्टक चुनाव प्रचार के बीच सभा में डीके शिवकुमार ने सांप्रदायिक आधार पर बनाए गए कानूनों को रद्द करने की बात कही थी।
स्कूलों में लौटेगा हिजाब ?
कनार्टक सरकार में मंत्री का बयान आते ही इस मुद्दे की चर्चा भी शुरू हो गई कि क्या स्कूलों में हिजाब लौटने वाला है। बता दें कि, गौरतलब है कि जनवरी, 2022 में कर्नाटक के स्कूल में हिजाब पहनने पर विवाद शुरू हो गया था। दरअसल, यहां के उडुपी में एक कॉलेज ने हिजाब पहनी छात्राओं को प्रवेश देने से इंकार कर दिया था। इसके बाद प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन का दौर शुस् हो गया था। देखते ही देखते इस मुद्दे के खिलाफ अन्य प्रदेशों में भी प्रदर्शन होने लगे थे।
नेताओं ने हिजाब बैन पर क्या कहा था
- AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि, हिजाब से प्रतिबंध जल्द से जल्द हटाया जाए क्योंकि ये सांस्कृतिक अधिकारों का हनन है।
- प्रियांक खड़गे ने कहा कि, यह एक नीतिगत मुद्दा है और सरकार इस मुद्दे को हल करने के लिए कानूनी रास्ते तलाशेगी।
- कांग्रेस विधायक एनए हारिस ने कहा था कि, हिजाब पर प्रतिबंध असंवैधानिक है। सरकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। भाजपा ने ऐसा किया है, तो यह असंवैधानिक है।"
हाईकोर्ट ने सुनाया था फैसला
हिजाब के मुद्दे ने जब जोर पकड़ा तब कनार्टक सरकार नपे स्कूल में इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद कुछ छात्राओं के माध्यम से इसे हाईकोर्ट तक ले जाया गया, लेकिन कोर्ट ने फैसला सुनाते ही इसे बरकरार रखने की बात कही थी। उस समय हाई कोर्ट ने कहा था कि हिजाब इस्लाम की आवश्यक धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है और शैक्षणिक संस्थानों में निर्धारित ड्रेस ही पहन कर छात्र-छात्राओं को आना होगा।
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