Kanhaiya Kumar Bihar Congress News: बिहार कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद एक बार फिर सतह पर आ गए हैं। इसकी वजह बनी है पार्टी के राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के इंचार्ज कन्हैया कुमार की 'पलायन रोको, नौकरी दो यात्रा'। इस यात्रा को लेकर पार्टी के अंदर ही असहमति के सुर उभरने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, बिहार कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता कन्हैया कुमार से इस बात को लेकर नाराज़ हैं कि उन्होंने यह यात्रा प्रदेश अध्यक्ष को बिना जानकारी दिए शुरू कर रहे है।
कन्हैया कुमार
बिना सूचना यात्रा, असंतोष की वजह
बताया जा रहा है कि यात्रा की घोषणा के दौरान कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु मौजूद थे, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। इससे पार्टी के अंदर खींचतान और असंतोष का माहौल पैदा हो गया है। कन्हैया की ये यात्रा 16 मार्च से बिहार के पश्चिम चंपारण से शुरू होगी और लगभग एक महीने चलेगी।
बैठक टली, कन्हैया की रणनीति पर उठेंगे सवाल?
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली थी, जिसे अब 18 मार्च तक टाल दिया गया है। माना जा रहा है कि इस बैठक में कन्हैया कुमार की यात्रा और उसकी टाइमिंग पर वरिष्ठ नेता सवाल खड़े कर सकते हैं।
आरजेडी में भी नाराजगी, मुस्लिम वोटरों की अनदेखी का आरोप
बिहार कांग्रेस की सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में भी इस यात्रा को लेकर असंतोष देखा जा रहा है। आरजेडी नेताओं को आपत्ति है कि यात्रा रमजान के दौरान निकाली जा रही है, जिससे मुस्लिम समुदाय नाराज़ हो सकता है। कांग्रेस और आरजेडी का मुस्लिम वोट बैंक काफी अहम है, ऐसे में इस यात्रा की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कांग्रेस को होगा नुकसान?
लोकसभा चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में पार्टी के अंदर चल रही यह खींचतान कांग्रेस के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। बिहार में पहले ही कांग्रेस संगठन कमजोर स्थिति में है, और ऐसे समय में आपसी टकराव पार्टी की जमीनी पकड़ को और कमजोर कर सकता है।
कन्हैया कुमार की यह यात्रा बेरोजगारी और पलायन जैसे मुद्दों पर केंद्रित है, जो बिहार के युवाओं के लिए अहम हैं। लेकिन पार्टी के अंदरूनी मतभेदों के चलते यह यात्रा कांग्रेस के लिए फायदा पहुंचाने के बजाय संकट खड़ा कर सकती है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को कैसे संभालता है और क्या कन्हैया की यह यात्रा बिहार कांग्रेस को मजबूती देगी या फिर और कमजोर करेगी।
