तमिलनाडु के करूर में हुए भगदड़ में एक्टर विजय फंसते दिख रहे हैं। एक्टर ने नेता बने विजय ही यहां रैली करने आए थे, जिसमें ये भगदड़ मची थी। पुलिस का कहना है कि विजय के प्रचार वाहन के भीतर देर तक रुके रहने और भीड़ की बेताबी बढ़ने के कारण ये भगदड़ मची थी। करूर भगदड़ में अब तक 41 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 60 लोग घायल हैं।
एक्टर विजय की रैली में मची थी भगदड़ (फोटो- PTI)
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प्राथमिकी में तीन पदाधिकारी नामजद
पुलिस ने विजय के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया है, लेकिन घटना से जुड़े टीवीके के तीन प्रमुख पदाधिकारियों—करूर उत्तर जिला सचिव मथियाझागन, प्रदेश महासचिव बुस्सी आनंद और उप महासचिव निर्मल कुमार—पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। इन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 110 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास), 125 (दूसरों के जीवन को खतरे में डालना), 223 (आदेश की अवज्ञा) और तमिलनाडु सार्वजनिक संपत्ति (क्षति और हानि निवारण) अधिनियम, 1992 की धारा 3 के तहत मामला दर्ज हुआ है।
कैसे हुई भगदड़
पुलिस के अनुसार, विजय के वाहन के भीतर लंबे समय तक रुकने से भीड़ में बेचैनी बढ़ी और लोग उन्हें देखने के लिए आगे बढ़ने लगे। संकरे इलाके में हजारों की भीड़ के उमड़ने से हालात बिगड़े। कुछ लोग स्टील शेड और पेड़ों पर चढ़ गए, जो अचानक गिर पड़े और नीचे खड़ी भीड़ पर जा गिरे। इस दौरान कई लोग दम घुटने और कुचलने से मारे गए। स्थिति संभालने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
जांच आयोग की कार्रवाई
राज्य सरकार ने घटना की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अरुणा जगदीशन की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग गठित किया है। न्यायमूर्ति ने करूर के सरकारी अस्पताल में घायलों से मुलाकात की और कहा कि रिपोर्ट पूरी होने के बाद सरकार को विस्तृत विवरण सौंपा जाएगा।
पीड़ितों से मिलने पर रोक
टीवीके सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने विजय को अस्पताल न जाने की सलाह दी, ताकि वहां अतिरिक्त भीड़ न जुटे। विजय ने शुरू में पीड़ितों से मिलने का इरादा जताया था, लेकिन संवेदनशील कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए उन्होंने ऐसा नहीं किया।
