भारत का 'विश्वगुरु' के रूप में होगा उदय विश्व में शांति लाने वाला होना चाहिए, 20 से 30 वर्षों में भारत बन जाएगा विश्व का नंबर एक राष्ट्र, बोले भागवत

हीरो एंटरप्राइज द्वारा आयोजित 18वें बीएमएल मुंजल पुरस्कार समारोह में मुख्य भाषण देते हुए भगवत ने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं है, बल्कि एक शाश्वत सभ्यता है जिसने आक्रमणों, विदेशी शासन और ऐतिहासिक उथल-पुथल का सामना किया है।

Mohan Bhagwat: आरएसएस प्रमुख मोहन भगवत ने सोमवार को कहा कि भारत का "विश्वगुरु" के रूप में उदय उसके सभ्यतागत मूल्यों द्वारा निर्देशित होना चाहिए और इसका उद्देश्य विश्व में शांति और समृद्धि लाना होना चाहिए। उन्होंने श्रम की गरिमा, समृद्धि के समान वितरण, नैतिक धन सृजन और राष्ट्र निर्माण में युवा पीढ़ी की भूमिका पर भी जोर दिया। हीरो एंटरप्राइज द्वारा आयोजित 18वें बीएमएल मुंजल पुरस्कार समारोह में मुख्य भाषण देते हुए भगवत ने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं है, बल्कि एक शाश्वत सभ्यता है जिसने आक्रमणों, विदेशी शासन और ऐतिहासिक उथल-पुथल का सामना किया है।

Mohan Bhagwat

मोहन भागवत (File phot0)

भारत शाश्वत और सदा नवजीवनशील है

उन्होंने कहा, गंगा हजारों वर्षों से बह रही है। यह प्राचीन है, फिर भी इसमें बहने वाला जल सदा नया है। गंगा शाश्वत और सदा नवजीवनशील है। भारत भी शाश्वत और सदा नवजीवनशील है। भारत केवल एक भौगोलिक क्षेत्र का नाम नहीं है। भारत एक अस्तित्व का नाम है, एक सभ्यतागत पहचान का नाम है। भागवत ने कहा कि भारत की प्रगति से न केवल देश को बल्कि पूरे विश्व को लाभ होगा।

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