Russian oil purchase : रूस से तेल नहीं खरीदने के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर भारत ने गुरुवार को अपनी पहली प्रतिक्रिया दी। भारत ने कहा कि खासतौर से जब ऊर्जा क्षेत्र में मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में बदलाव हो रहे हैं, वह देश की 1.4 अरब आबादी को अपनी शीर्ष प्राथमिकता में रखना जारी रखेगा। दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि 'जहां तक भारत की ऊर्जा सुरक्षा एवं इसके खरीदने की बात है, मेरे साथ-साथ सरकार ने भी कई अवसरों पर स्पष्ट किया है कि 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है।'
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल।
1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा हमारी प्राथमिकता-MEA
मीडिया के इस सवाल पर, जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के रूसी तेल न खरीदने का दावा किया गया था, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'जहां तक भारत की ऊर्जा सुरक्षा या ऊर्जा स्रोतों का सवाल है, सरकार कई अवसरों पर सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट कर चुकी है, जिसमें यहां मेरे बयान भी शामिल हैं कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बाजार की स्थितियों और बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी रणनीति का मूल है। भारत के सभी फैसले इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर लिए गए हैं और आगे भी लिए जाते रहेंगे।'
भारतीय नाविकों की रिहाई पर बातचीत जारी
एनएसए अजित डोभाल और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच पिछले साल हुई किसी बैठक की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रवक्ता ने कहा कि 'उस रिपोर्ट का कोई आधार नहीं है। ऐसी कोई बैठक या यात्रा नहीं हुई।' ईरान में हिरासत में लिए गए 16 भारतीय नाविकों के बारे में उन्होंने कहा, 'हमें कांसुलर एक्सेस मिला है और बंदर अब्बास में हमारे अधिकारियों ने उनसे मुलाकात की है। 16 में से आठ को रिहा किए जाने की जानकारी हमें मिली है और यात्रा संबंधी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद वे स्वदेश लौटेंगे। शेष आठ नाविकों को आवश्यक सहायता देने के लिए हम ईरानी अधिकारियों के संपर्क में बने हुए हैं।'
किताब पर रक्षा मंत्रालय ने कुछ कदम उठाए हैं-जायसवाल
चीन और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के मुद्दे पर MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (@MEAIndia) ने कहा, 'जहां तक चीन और LAC का सवाल है, जब भी द्विपक्षीय बातचीत होती है, हम आधिकारिक माध्यमों और प्रेस ब्रीफिंग के जरिए आपको जानकारी देते हैं कि वहां शांति और स्थायी स्थिरता के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं। जहां तक किताब का सवाल है, पिछले कुछ वर्षों में इस पर बातचीत हुई है और रक्षा मंत्रालय ने कुछ कदम उठाए हैं। आप देख सकते हैं कि उनका रुख क्या रहा है और उन्होंने इस मुद्दे पर कैसी स्थिति अपनाई है।'
