रेलवे ने यात्री सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए एक अहम कदम उठाया है। मंगलवार को रेल मंत्रालय ने दो बड़े सुधारों को मंजूरी दी है, जो भारतीय रेलवे के ढांचे में बड़े बदलाव लेकर आएंगे। रेलवे रिफॉर्म प्लान के तहत 52 हफ्तों में 52 सुधार का लक्ष्य रखा गया है, जिसे 52 reforms in 52 weeks कहा गया है। इसका उद्देश्य साल भर में रेलवे को और अधिक ग्राहक-अनुकूल और लॉजिस्टिक्स में शक्तिशाली बनाना है।
रेलवे ने जनरल कोच की सफाई को लेकर एक अहम कदम उठाया है।
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कार्गो ट्रांसपोर्टर है भारतीय रेलवे
शनिवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि एसी और स्लीपर की तरह जनरल डिब्बों में भी यात्रा के दौरान लगातार सफाई होगी। अब तक चलती ट्रेन में मुख्य रूप से आरक्षित कोचों की सफाई होती थी, जबकि जनरल डिब्बे उपेक्षित रह जाते थे। रेल मंत्री अश्विणी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw)ने कहा कि रेलवे अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कार्गो ट्रांसपोर्टर बन चुका है और नई तकनीकों व कार्यप्रणालियों के साथ आगे बढ़ रहा है।
कोच की सफाई के लिए AI से हीगी मॉनिटरिंग
पिछले सिस्टम में जहां सफाई और सेवाएं मुख्य रूप से रिजर्व कोचों तक सीमित थीं, अब जनरल कोचों की लगातार सफाई को सुनिश्चित करने की व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके लिए सेवाएं एक ही एजेंसी द्वारा प्रदान की जाएंगी और AI-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम से सफाई की गुणवत्ता की निगरानी की जाएगी।
रेल मंत्री ने जानकारी दी कि दूसरे बड़े सुधार के तहत गति शक्ति कार्गो टर्मिनल (Gati Shakti Cargo Terminals) को और सुदृढ़ किया जाएगा। 2022 में शुरू की गई नीति के तहत अब 124 मल्टी-मॉडल टर्मिनलों को 500 से अधिक कार्ग प्ल्स प्रोसेसिंग (Cargo-Plus-Processing) हब्स में बदलने की योजना है।
इससे न केवल ट्रैफिक और राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि खाद्य अनाज व सीमेंट जैसे सामग्रियों के लॉजिस्टिक्स खर्चों में कमी और संसाधनों के स्थानीय पैकेजिंग/प्रोसेसिंग से भी लागत घटेगी।पहले चरण में विभिन्न जोनों में चलने वाली लंबी दूरी की 80 ट्रेनों को चुना गया है। छह महीने में यह व्यवस्था सभी ट्रेनों में लागू कर दी जाएगी।
जनरल कोचों की भी होगी सफाई
रेल मंत्री ने जानकारी दी कि नई व्यवस्था में ट्रेन की शुरुआत से अंतिम स्टेशन तक टॉयलेट, वाश-बेसिन, डस्टबिन और कोच के अंदर नियमित सफाई सुनिश्चित की जाएगी। स्टेशन पर रुकने के दौरान सफाई कर्मी आरक्षित डिब्बों से उतरकर जनरल कोचों में भी काम करेंगे।
कोच की तस्वीरें भेजी जाएंगी कंट्रोल रूम
सफाई केवल औपचारिकता न रहे, इसके लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। सेवा प्रदाता कंपनियों के साथ स्पष्ट मानक तय किए जाएंगे। सफाई के बाद कोच की तस्वीरें कंट्रोल रूम में भेजी जाएंगी, जहां एआई के माध्यम से गुणवत्ता की जांच होगी।
मानकों पर खरा न उतरने पर दंड का प्रविधान भी होगा। सफाई, लिनन वितरण और संग्रह जैसे काम अलग-अलग एजेंसियों के बजाय एकीकृत रूप से एक ही एजेंसी को दिए जाएंगे, ताकि जवाबदेही तय की जा सके।
