Indian Navy: नौसेना प्रमुख, एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना समुद्र के रास्ते पाकिस्तान पर हमला करने से बस कुछ ही मिनट दूर थी, तभी पड़ोसी देश ने सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया। उन्होंने आगे कहा कि नौसेना की कार्रवाई ने राष्ट्रीय आत्मविश्वास को मजबूत किया और पश्चिमी तट पर एक ऐतिहासिक रात भर की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने के उद्देश्य से की गई एक सैन्य कार्रवाई थी। इसे अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद शुरू किया गया था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर हमले किए, जिसमें कई आतंकवादी मारे गए।
अंत समय में क्यों रुक गई नौसेना?
नौसेना अलंकरण समारोह में नौसेना प्रमुख ने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर ने भारतीय नौसेना की अनुकरणीय तत्परता और दृढ़ संकल्प का प्रदर्शन किया, क्योंकि हमारी इकाइयों ने तेजी से तैनाती की और पूरी अवधि के दौरान बेहद आक्रामक रुख बनाए रखा। अब यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि हम समुद्र के रास्ते पाकिस्तान पर हमला करने से बस कुछ ही मिनट दूर थे, जब उन्होंने (पाकिस्तान) सैन्य कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया।'
उन्होंने कहा, 'ऑपरेशन सिंदूर के दौरान त्वरित और दृढ़ कार्रवाई के माध्यम से, भारतीय नौसेना ने अपनी क्षमताओं पर राष्ट्र के आत्मविश्वास और भरोसे को और मजबूत किया। ऑपरेशन सिंदूर और पूरे वर्ष जारी रही निरंतर परिचालन गति के अलावा, हमें पश्चिमी तट पर भारतीय नौसेना के साथ 17 घंटे की ऐतिहासिक रात भर की यात्रा के दौरान माननीय प्रधानमंत्री के सामने अपनी परिचालन क्षमताओं की व्यापकता और गहराई का प्रदर्शन करने पर भी बहुत गर्व हुआ।'
जंग नहीं करती तो दिल जीतती है नौसान
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि नौसेना ने म्यांमार और श्रीलंका में त्वरित मानवीय मिशनों के माध्यम से इस क्षेत्र में 'प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता' (First Responder) के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत किया, साथ ही एक ही वर्ष में 12 जहाजों और पनडुब्बियों को शामिल करके अपनी क्षमताओं को भी आगे बढ़ाया।
उन्होंने कहा, 'साथ ही, भारतीय नौसेना ने इस क्षेत्र में 'प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता' के रूप में भारत की प्रतिबद्धता को बनाए रखा, जिसके लिए कम समय में और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में विभिन्न HADR (मानवीय सहायता और आपदा राहत) मिशन चलाए गए - म्यांमार में ऑपरेशन ब्रह्मा से लेकर श्रीलंका में ऑपरेशन सागर बंधु तक। आत्मनिर्भरता पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने से न केवल हम 'बिल्डर्स नेवी' (जहाज बनाने वाली नौसेना) में अपना परिवर्तन पूरा कर पाए, बल्कि एक ही वर्ष में 12 जहाजों और पनडुब्बियों को शामिल करके क्षमता वृद्धि में भी हमें जबरदस्त गति मिली।'
नौसेना की असली ताकत क्या?
उन्होंने आगे कहा कि नौसेना की असली ताकत उसके कर्मियों में निहित है, जिनका समर्पण और कौशल राष्ट्र की सेवा में लगातार उत्कृष्ट योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा, 'फिर भी आज, हम न केवल पिछले साल की उपलब्धियों को स्वीकार करते हैं, बल्कि हम भारतीय नौसेना की उस स्थायी सफलता का भी सम्मान करते हैं, जो लगातार प्रयासों और शांत दृढ़ता से हासिल की गई है। आज हम जिस चीज का जश्न मना रहे हैं, उसके मूल में हमारी ताकत की वह स्थायी नींव है, ये हैं हमारे लोग; जो अपनी प्रतिबद्धता, चरित्र और काबिलियत के दम पर देश की सेवा पूरी निष्ठा से करते आ रहे हैं।'
'ऑपरेशन सिंदूर' क्या था?
पहलगाम आतंकी हमले के बाद, 7 मई 2025 को शुरू किया गया 'ऑपरेशन सिंदूर', तीनों सेनाओं की एक सुनियोजित और समन्वित जवाबी कार्रवाई थी; जिसमें सटीकता, पेशेवरपन और एक स्पष्ट उद्देश्य की झलक मिलती है। ऑपरेशन सिंदूर को एक दंडात्मक और लक्षित अभियान के तौर पर तैयार किया गया था, जिसका मकसद 'लाइन ऑफ कंट्रोल' (LoC) के पार और पाकिस्तान के अंदरूनी इलाकों में मौजूद आतंकी ढांचे को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करना था।
विभिन्न एजेंसियों से मिली खुफिया जानकारी ने नौ ऐसे बड़े आतंकी शिविरों की पुष्टि की, जिन्हें इस ऑपरेशन के दौरान अंततः निशाना बनाया गया। भारत की यह जवाबी कार्रवाई बेहद बारीकी से की गई योजना और खुफिया जानकारी पर आधारित रणनीति का परिणाम थी; जिसने यह सुनिश्चित किया कि ऑपरेशन के दौरान आम नागरिकों या संपत्ति को कम से कम नुकसान पहुंचे। इस मिशन में 'ऑपरेशनल एथिक्स' (अभियान संबंधी नैतिक मूल्यों) को सर्वोपरि रखा गया था, और आम नागरिकों को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे, इसके लिए हर कदम पर संयम बरता गया।
