Mob Lynching: जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने रविवार को देश में बढ़ती हिंसा और हत्या की घटनाओं का हवाला देते विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत धीरे-धीरे 'लिंचिस्तान' बनता जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती (फाइल फोटो साभार: PTI)
महबूबा मुफ्ती ने क्या कुछ कहा?
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जब बांग्लादेश में हमारे कुछ हिंदू भाइयों को पीट-पीटकर मार डाला गया तो बहुत शोर-शराबा हुआ, लेकिन जब हमारे अपने देश में लिंचिंग होती है तो यह 'अखलाक' से शुरू होती है और रुकती नहीं है।
समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक, महबूबा मुफ्ती ने कहा कि हिंसा की घटनाओं का अंत होना चाहिए और सभी समुदायों को पहले की तरह एक साथ रहना चाहिए। उन्होंने कहा, "सांप्रदायिक सद्भाव का सबसे अच्छा उदाहरण जम्मू कश्मीर है, जहां लोग कंधे से कंधा मिलाकर रहते हैं।"
'कठिन दौर से गुज रहे जम्मू-कश्मीर के लोग'
महबूबा ने कहा कि 'कठ बात' लोगों, विशेषकर युवाओं के लिए एक ऐसा मंच है, जहां वे अपने सामने आने वाले विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "जम्मू कश्मीर के लोग एक कठिन दौर से गुजर रहे हैं, क्योंकि वे घुटन महसूस कर रहे हैं और अपनी राय व्यक्त करने में असमर्थ हैं। यह उनके लिए अपनी आवाज उठाने का एक मंच है।"
सामान्य वर्ग के छात्रों द्वारा आरक्षण नीति के विरोध में आयोजित प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कई नेताओं को नजरबंद कर दिया गया है। उन्होंने पूछा, "उन्हें (छात्रों को) शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है?"
अधिकारियों ने रविवार को नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी समेत कई नेताओं को घर में नजरबंद कर दिया ताकि उन्हें जम्मू कश्मीर में मौजूदा आरक्षण नीति के खिलाफ छात्रों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से रोका जा सके। अधिकारियों ने बताया कि महबूबा की बेटी और पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती, श्रीनगर के सांसद रुहुल्लाह मेहदी, पीडीपी नेता वहीद पारा और श्रीनगर के पूर्व मेयर जुनैद मट्टू को नजरबंद कर दिया गया है।
