भारत अब समुद्री ताकत बनने की दिशा में बड़ा कदम उठा चुका है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जहाज निर्माण और समुद्री क्षेत्र को नया जोश देने के लिए 69,725 करोड़ रुपये का पैकेज मंजूर कर दिया है। इस कदम का मकसद सिर्फ जहाज बनाने की क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि नौका निर्माण, तकनीकी कौशल, रोजगार और निवेश सभी को एक साथ आगे बढ़ाना है।
सबसे पहले जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना (SBFAS) को 2036 तक बढ़ाया गया है, जिसमें 24,736 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना से शिपयार्ड को आसान फंडिंग मिलेगी और शिपब्रेकिंग जैसे क्षेत्र में भी विकास होगा।
इसके साथ ही 25,000 करोड़ रुपये की समुद्री विकास निधि (MDF) बनाई गई है। इसमें 20,000 करोड़ का निवेश कोष और 5,000 करोड़ का ब्याज प्रोत्साहन कोष शामिल है। इसका फायदा यह होगा कि बड़ी नौका परियोजनाओं को लंबी अवधि का फंडिंग आसानी से मिल सके, और बैंकिंग खर्च भी कम होगा।
19,989 करोड़ रुपये की जहाज निर्माण विकास योजना से देश की जहाज निर्माण क्षमता सालाना 4.5 मिलियन सकल टन तक बढ़ेगी। इसके जरिए नए शिपयार्ड तैयार होंगे, तकनीकी और डिज़ाइन कौशल मजबूत होंगे, बीमा और जोखिम कवरेज मिलेंगे, और समुद्री विश्वविद्यालय के अंतर्गत नौवहन प्रौद्योगिकी केंद्र भी स्थापित होगा।
इस पूरे पैकेज से लगभग 30 लाख रोजगार पैदा होंगे और 4.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आएगा। आम जनता के लिए इसका मतलब है :- नौकरी के नए मौके, बेहतर सप्लाई चैन, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा की मजबूती, और समुद्री क्षेत्र में नई तकनीकों का विकास।
इस पहल से जहाज निर्माण, नौका डिजाइनिंग, शिपब्रेकिंग, तकनीकी शिक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश सभी क्षेत्रों में तरक्की होगी। यानी सिर्फ उद्योग ही नहीं, बल्कि युवा, इंजीनियर, व्यापार और पूरे देश की अर्थव्यवस्था इस योजना से सीधे लाभान्वित होंगे।भारत का समुद्री इतिहास गौरवशाली रहा है, और अब यह कदम देश को वैश्विक जहाज निर्माण और नौवहन के क्षेत्र में सशक्त बना देगा।
