Brahmos Next Generation Missile: ब्रह्मोस अब सिर्फ एक मिसाइल नहीं है, यह एक आत्मविश्वास से भरे, आत्मनिर्भर नए भारत की शक्ति, सटीकता और गर्व है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने पहली बार इस हथियार प्रणाली को सक्रिय युद्ध में तैनात किया था। नूर खान जैसे प्रमुख पाकिस्तानी हवाई अड्डों सहित महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर हमला करके सशस्त्र बलों ने इस हथियार प्रणाली की ताकत का प्रदर्शन किया था। ब्रह्मोस प्रणाली भारत के रक्षा निर्यात का भी एक आधार स्तंभ है, जो 62.7 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के साथ 38,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के CEO और MD डॉ. जयतीर्थ जोशी ने जानकारी दी, "हमें उम्मीद है कि हम 2029 तक इसका पहला मॉडल तैयार कर लेंगे। इस नए सिस्टम में स्वदेशी पुर्जों की मात्रा अधिक होगी और इसमें कई नई तकनीकें और उन्नत सामग्री भी शामिल होंगी। इसके लिए हमें बड़े पैमाने पर अनुसंधान और विकास कार्य करने की आवश्यकता है, जिसे हमने पहले ही शुरू कर दिया है। हमने अपनी योजनाएं तैयार कर ली हैं और लगातार उनकी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।"
ब्रह्मोस (फोटो साभार- ANI)
भारत की सैन्य निर्यात रणनीति में सबसे आगे
ब्रह्मोस की सफलता पर बोलते हुए ब्रह्मोस एयरोस्पेस के सीईओ और एमडी डॉ. जयतीर्थ जोशी ने कहा, ब्रह्मोस की निर्यात मोर्चे पर सफलता की कहानी 2025 में युद्ध-परीक्षण से पहले ही शुरू हो गई थी। 2022 में हमें अपना पहला ऐतिहासिक निर्यात ऑर्डर मिला, और उस बहु-मिलियन डॉलर के सौदे ने वैश्विक क्षेत्र में भारत की रक्षा निर्यात आकांक्षाओं को आगे बढ़ाया। आज, ब्रह्मोस भारत की सैन्य निर्यात रणनीति में सबसे आगे है। एक प्रमुख उत्पाद के रूप में, सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ने अपने निर्यात दायरे को लगातार बढ़ाया है, खासकर मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपनी बेदाग क्षमताओं को स्थापित करने और युद्ध-सिद्ध प्रणाली बनने के बाद। हमने इस साल फिलीपींस के साथ अपने पहले निर्यात सौदे के बाद दक्षिण पूर्व एशिया के दो और देशों के साथ सौदे किए हैं। इसलिए, हम आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती से स्थित हैं, और अपने निर्यात आधार को और बढ़ाने के लिए तत्पर हैं।
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ब्रह्मोस की तेजी से बढ़ती मांग
डॉ. जोशी ने कहा कि ब्रह्मोस बढ़ती मांग और क्षमता को पूरा करने के लिए आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत करने पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा, निकट और दीर्घकालिक प्राथमिकताएं हमारे सशस्त्र बलों से अब तक प्राप्त सभी ऑर्डरों को पूरा करना है। हैदराबाद, नागपुर, पिलानी और लखनऊ में हमारी सभी उत्पादन इकाइयां इस दिशा में पूरी गति से काम कर रही हैं। हम अगली पीढ़ी के ब्रह्मोस को विकसित करने और परीक्षण करने के लिए आवश्यक विशिष्ट प्रौद्योगिकियों के लिए टेक-ब्रिक्स स्थापित करके अपने अनुसंधान एवं विकास कार्य में तेजी लाने का भी इरादा रखते हैं। बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और किसी भी स्थिति में क्षमता बढ़ाना। प्रत्येक सिस्टम और सब-सिस्टम के पहले के 1-2 उद्योग भागीदारों से हम 4-5 स्रोत विकसित करने के इच्छुक हैं। इससे गुणवत्ता और कीमत के मामले में प्रतिस्पर्धा लाने में भी मदद मिलेगी।
एक प्रमुख विकास ब्रह्मोस-एनजी होगा, जो एक छोटी, हल्की और अधिक स्टील्थ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। डॉ. जोशी कहते हैं कि पहला प्रोटोटाइप 2027-2028 तक विकसित किया जाएगा। वहीं 1,500 किलोमीटर स्ट्राइक वेरिएंट भी भविष्य की योजना है। 6 अक्टूबर को रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के जहाजों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लांचर की खरीद के लिए ब्रह्मोस एयरोस्पेस के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए, जिसमें न्यूनतम 68 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री है।
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान पर मचाई थी तबाही
गौरतलब है कि ब्रह्मोस (BrahMos) भारत के DRDO और रूस के NPO Mashinostroyenia द्वारा विकसित की गई दुनिया की सबसे तेज और घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी के नाम पर इसका नाम रखा गया है। भारतीय वायुसेना ने पिछले दिनों ऑपरेशन सिंदूर के समय सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल किया था। इस दौरान ब्रह्मोस ने दुश्मन के रडार को चकमा देकर पाकिस्तान पर बेहद ही सटीक निशाने साधे थे। भारत न सिर्फ अपने लिए इस मिसाइल का इस्तेमाल कर रहा है, बल्कि इंडोनेशिया जैसे देशों को यह मिसाइल सप्लाई भी कर रहा है। अब इसकी सटीकता की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है।
