Impeachment Motion: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक एक बार फिर महाभियोग प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। विपक्षी दलों ने प्रस्ताव का नया ड्राफ्ट तैयार करना शुरू कर दिया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (फाइल फोटो)
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, विपक्षी दल अगले सप्ताह लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में नोटिस दे सकते हैं। यह कदम ऐसे समय पर उठाया जा रहा है जब चुनाव आयोग के भीतर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से संबंधित इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट सामने आई जिसके बाद चुनाव आयोग को बयान तक जारी करना पड़ा।
नए तथ्यों के साथ दिया जाएगा नोटिस
बकौल INDIA ब्लॉक, नए महाभियोग प्रस्ताव में हाल में सामने आई जानकारियों और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर उठे नए सवालों को आधार बनाया जाएगा। साथ ही, पहले के प्रस्ताव के बाद सामने आए नए तथ्यों को भी नए नोटिस में शामिल किया जाएगा।
CEC के खिलाफ तीसरी बार नोटिस की तैयारी
समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर सहमति है और हाल में चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों से जुड़ी खबरें सामने आने के बाद इस पहल को आगे बढ़ाने की तैयारी है। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दल तीसरी बार नोटिस देने की तैयारी में हैं। बीते 24 अप्रैल को राज्यसभा में 73 विपक्षी सदस्यों ने उनके खिलाफ नोटिस दिया था।
इससे पहले भी दोनों सदनों में विपक्षी सांसदों की ओर से ऐसा प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया था, जिसे खारिज कर दिया गया था। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत निर्धारित है और इसके लिए संसद में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होता है।
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विपक्षी खेमे का कहना है कि अप्रैल में दिए गए महाभियोग नोटिस में सीईसी के खिलाफ कुल 9 आरोप लगाए गए थे। अब SIR से जुड़े मीडिया खुलासों के बाद विपक्ष इन आरोपों में नए बिंदु जोड़ने की तैयारी में है।
'आयोग के सभी फैसले कानूनी रूप से वैध'
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने बुधवार को आयोग के सभी फैसलों को कानूनी रूप से वैध बताया था। आयोग ने कहा था कि उसके सभी आधिकारिक आदेश, फैसले और प्रशासनिक निर्देश पूरी तरह से कानूनी रूप से वैध हैं तथा किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने यह भी कहा था कि चुनाव आयुक्तों द्वारा दिए गए सुझाव चुनावी प्रक्रियाओं में और सुधार के लिए थे।
