मुआवजे का इंतजार किए बिना सौंप दी जमीन... बांग्लादेश बॉर्डर पर फेंसिंग को लेकर कूचबिहार के लोगों ने उठाया अनूठा कदम

पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर अधूरी पड़ी बॉर्डर फेंसिंग को पूरा करने के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने देशहित में अपनी निजी जमीनें स्वेच्छा से प्रशासन को सौंप दी हैं। भूमि अधिग्रहण और तकनीकी बाधाओं के कारण वर्षों से रुका यह प्रोजेक्ट अब तेजी से पूरा किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि खुली सीमा की वजह से घुसपैठ, तस्करी और असुरक्षा का खतरा बना रहता था, इसलिए उन्होंने मुआवजे का इंतजार किए बिना जमीन देने का फैसला किया। बीएसएफ और प्रशासन ने इस कदम की सराहना की है।

India-Bangladesh Border Fencing: बंगाल की सुवेंदु अधिकारी सरकार घुसपैठियों के खिलाफ पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुकी है। सरकार में आने के बाद ही उसने कदम उठाने शुरू कर दिए। इसी बीच कूचबिहार जिले से राष्ट्रीय सुरक्षा और देशभक्ति की एक अनूठी मिसाल सामने आई है, जहां स्थानीय ग्रामीणों ने भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कंटीले तारों की फेंसिंग (बॉर्डर बाड़) के अधूरे काम को पूरा करने के लिए अपनी निजी जमीनें स्वेच्छा से दान कर दी हैं।

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भारत-बांग्लादेश बॉर्डर की फाइल फोटो। ANI

सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले इस इलाके में भूमि अधिग्रहण की समस्याओं और कुछ तकनीकी कारणों की वजह से फेंसिंग का काम सालों से रुका हुआ था, जिससे यह खुला हुआ बॉर्डर घुसपैठ और मवेशी तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों के लिए बेहद संवेदनशील रूट बना हुआ था।

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