कोर्ट एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें एयर-प्यूरीफायर को 'मेडिकल डिवाइस' के तौर पर कैटेगरी में रखने और उन पर लगने वाले गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) को 18 से घटाकर 5 प्रतिशत करने के निर्देश देने की मांग की गई थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण संकट से निपटने में अधिकारियों की नाकामी पर केंद्र सरकार को फटकार लगाई।
एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस घोषित किए जाने की मांग वाली जनहित याचिका (फोटो: canva)
एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस घोषित किए जाने की मांग वाली जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका मे एयर प्यूरीफायर को मेडिकल डिवाइस घोषित करने और इसपर लगने वाला GST 18% से घटाकर 5% किए जाने की मांग भी की गई है।
'एयर प्यूरीफायर पर GST को खत्म कर देना चाहिए या कम कर देना चाहिए'
हाईकोर्ट ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन पर पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी की दिसंबर 2025 में संसद को सौंपी गई सिफारिशों पर भी गौर किया, जिसमें कहा गया था कि सरकार को सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए और एयर प्यूरीफायर या HEPA फिल्टर पर GST को खत्म कर देना चाहिए या कम कर देना चाहिए।
प्यूरीफायर पर GST कम क्यों नहीं किया जा सकता?
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि पहली नज़र में उसे कोई ऐसा कारण नहीं दिखता कि प्यूरीफायर पर GST कम क्यों नहीं किया जा सकता।हाईकोर्ट ने GST काउंसिल को GST कम करने या हटाने के मुद्दे पर विचार करने का भी निर्देश दिया है।
'GST काउंसिल को जल्द से जल्द बैठक करनी चाहिए'
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि दिल्ली और आसपास के इलाकों में हवा की क्वालिटी की स्थिति को देखते हुए, हमें लगता है कि GST काउंसिल को जल्द से जल्द बैठक करनी चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट अब 26 दिसंबर को अगली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील को यह बताने को कहा है कि GST काउंसिल की बैठक कितनी जल्दी संभव हो सकती है।
