CM Vijay : तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार को उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब राज्य सरकार के एक मंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके के दिवंगत नेता एम. करुणानिधि को उनके पारंपरिक सम्मानजनक संबोधन के बिना केवल उनके नाम से पुकार दिया। इसके विरोध में विपक्षी दल डीएमके (DMK) के विधायकों ने सदन में जोरदार प्रदर्शन किया। स्थिति बिगड़ते देख मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए मंत्री की ओर से सदन में माफी मांगी।
सीएम विजय ने विधानसभा में मांगी माफी
कैसे शुरू हुआ विवाद?
विधानसभा में स्वास्थ्य और राजस्व विभाग के अनुदान मांगों पर चर्चा चल रही थी। भाषण के दौरान वन मंत्री आर. वी. रंजीत कुमार पिछली सरकारों के 'कैश-फॉर-वोट' प्रथा और विवादित 'तिरुमंगलगम फॉर्मूले' की आलोचना कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 2026 में उनकी सरकार बिना कोई पैसा बांटे सत्ता में आई है। चुनाव रणनीति का जिक्र करते हुए मंत्री रंजीत कुमार ने डीएमके के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि को "कलैग्नार" या पूर्व मुख्यमंत्री कहने के बजाय सीधे केवल करुणानिधि कहकर संबोधित कर दिया।
डीएमके का हंगामा और स्पीकर का फैसला
तमिलनाडु विधानसभा की लंबे समय से यह परंपरा रही है कि दिग्गज और सम्मानित नेताओं का नाम पूरे सम्मान और प्रोटोकॉल के साथ लिया जाता है। मंत्री के बयान के तुरंत बाद पूर्व मंत्री के. के. एस. एस. आर. रामचंद्रन के नेतृत्व में डीएमके विधायकों ने इसे संसदीय मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए जोरदार हंगामा शुरू कर दिया। मामले को गंभीर होता देख विधानसभा अध्यक्ष जे. सी. डी. प्रभाकर ने मंत्री के इस बयान को सदन की कार्यवाही से हटा दिया।
मुख्यमंत्री विजय का हस्तक्षेप और माफी
हंगामे के बीच मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने वन मंत्री को भाषण देने से बीच में ही रोक दिया। मुख्यमंत्री विजय ने स्वीकार किया कि दिवंगत नेता को इस तरह से संबोधित करना गलत था। सीएम विजय ने सदन में कहा, आपके नेता का नाम इस प्रकार लेना गलत था। मैं मंत्री की ओर से आप सभी से माफी मांगता हूं। मुख्यमंत्री के तुरंत हस्तक्षेप और माफी मांगने के बाद विपक्ष का विरोध शांत हुआ और विधानसभा की कार्यवाही आगे बढ़ सकी।
