अपनी सुरक्षित भवानीपुर सीट कैसे हार गईं TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी? 'दीदी' पर 'दादा' क्यों पड़े भारी? जानिए 5 कारण

भवानीपुर टीएमसी का गढ़ है और ममता बनर्जी का घर भी यहीं है। स्वाभाविक है कि यह सीट उनके लिए सुरक्षित थी। 2021 में जब वह नंदीग्राम में चुनाव हार गईं तो उसके बाद इसी सीट पर हुए उपचुनाव को जीतकर वह विधानसभा पहुंचीं लेकिन इस बार इस सीट पर भाजपा ने उनकी घेराबंदी इस तरह से की।

Mamata Banerjee: बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रस की भारी हार हुई है। यहां तक कि मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी भी अपना सीट नहीं बचा पाईं। भवानीपुर सीट से वह हार गईं। इस सीट पर उन्हें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सुवेंदु अधिकारी ने उन्हें 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। इस हार के साथ ममता के नाम एक और शर्मनाक रिकॉर्ड जुड़ गया है। वह पद पर रहते हुए विधानसभा चुनाव दूसरी बार हारने वाली देश की पहली मुख्यमंत्री बन गई हैं। इससे पहले 2021 के चुनाव में सुवेंदु ने उन्हें नंदीग्राम सीट पर हराया था लेकिन इस बार ममता ने अपने लिए सुरक्षित सीट मानी जाने वाली भवानीपुर से चुनाव लड़ने का फैसला किया।

mamata vs suvendu

भवानीपुर सीट हार गईं ममता बनर्जी।

ममता को 58,812 वोट मिले

भवानीपुर टीएमसी का गढ़ है और ममता बनर्जी का घर भी यहीं है। स्वाभाविक है कि यह सीट उनके लिए सुरक्षित थी। 2021 में जब वह नंदीग्राम में चुनाव हार गईं तो उसके बाद इसी सीट पर हुए उपचुनाव को जीतकर वह विधानसभा पहुंचीं लेकिन इस बार इस सीट पर भाजपा ने उनकी घेराबंदी इस तरह से की, ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया जिसे वह तोड़ नहीं पाईं। इस सीट पर ममता को 58,812 वोट और सुवेंदु को 73,917 वोट मिले। यहां हम बात करेंगे कि अपनी इस सुरक्षित सीट को ममता आखिर बचा क्यों नहीं पाईं।

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