Karnataka Politics: कर्नाटक में कांग्रेस की चुनौतियां कम नहीं हो रहीं हैं। काफी मशक्कत के बाद सीएम पद की गुत्थी तो उसने सुलझा ली है लेकिन नई सरकार के गठन में उसके सामने कई और चुनौतियां पेश आ रही हैं। सूत्रों की मानें तो सबसे बड़ी चुनौती मंत्रियों की संख्या और उनकी दावेदारी को लेकर है। कई नेता मंत्री पद का दावा कर रहे हैं। तीन जनवरी को डीके शिवकुमार को सीएम पद की शपथ दिलाई जानी है। शिवकुमार के साथ कैबिनेट में कितने मंत्री शपथ लेंगे, इस पर अभी निर्णय नहीं हो सका है। मंत्रियों की संख्या और उनके नाम पर सस्पेंस बरकरार है। सूत्रों का कहना है कि कितने विधायकों को मंत्री बनाया जाएगा और कैबिनेट में मंत्रियों की संख्या को लेकर कांग्रेस में लंबी-लंबी बैठकें हुई हैं लेकिन अभी कोई नतीजा नहीं निकल पाया है। यही नहीं कांग्रेस अध्यक्ष पद पर भी अभी कोई नाम तय नहीं हो पाया है।
तीन जून को सीएम पद की शपथ लेंगे डीके शिवकुमार। तस्वीर-AI
DK के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती
कर्नाटक मंत्रिपरिषद में मुख्यमंत्री सहित कुल 34 मंत्री शामिल हो सकते हैं। ऐसे में मंत्री पद के दावेदारों की बड़ी संख्या और सीमित पदों को देखते हुए शिवकुमार के सामने संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। नेताओं में मंत्री पद के लिए लामबंदी तेज हो गई है। कई नेताओं ने दिल्ली पहुंचकर अपनी दावेदारी मजबूत की है। सिद्दारमैया कैबिनेट के पुराने चेहरे और विधायक जोर-आजमाइश कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि शिवकुमार अपनी कैबिनेट में जातीय एवं क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश कर सकते हैं। सिद्दारमैया के करीबी नेताओं को भी मंत्रिपरिषद में जगह मिल सकती है।
डिप्टी सीएम पद की रेस में हैं कई नाम
कर्नाटक प्रदेश अध्यक्ष के लिए भी अभी नया नाम तय नहीं हो पाया है। अभी यह पद शिवकुमार के पास है। जाहिर है कि उनके सीएम बन जाने के बाद किसी नए चेहरे को यह जिम्मेदारी मिलेगी। इस पद के लिए पूर्व मंत्री सतीश जारकीहोली का नाम रेस में सबसे आगे बताया जा रहा है। तो डिप्टी सीएम की रेस में जारकीहोली, यू. टी. खादर, प्रियांक खरगे, एमबी पाटिल और ईश्वर खंडरे जैसे कई नाम रेस में हैं। ऐसे में गुटों की नाराजगी दूर करने के लिए एक से अधिक उपमुख्यमंत्री बनाने या किसी को भी न बनाने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है।
'पार्टी आलाकमान जो तय करेगा, वही होगा'
पार्टी सूत्रों के अनुसार, मंत्री पद के दावेदारों की लंबी कतार और उपलब्ध पदों की सीमित संख्या के बीच शिवकुमार के सामने संतुलन साधने की बड़ी चुनौती है। उन्हें हर कदम बेहद सावधानी से उठाना होगा, क्योंकि मंत्रिमंडल में जगह नहीं पाने वाले नेताओं की नाराजगी बड़े स्तर पर असंतोष का रूप ले सकती है। रविवार को जब पत्रकारों ने शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने वाले मंत्रियों की संख्या के बारे में पूछा, तो शिवकुमार ने कहा, 'मुझे जानकारी नहीं है। पार्टी आलाकमान जो तय करेगा, वही होगा। मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।’
मंत्रिमंडल गठन को लेकर विचार-विमर्श जारी
जहां सिद्धरमैया की भंग हो चुकी मंत्रिपरिषद के कुछ मंत्री नए मंत्रिमंडल में अपनी जगह बरकरार रखने की कोशिश में जुटे हैं, वहीं इस बार मंत्री बनने की उम्मीद लगाए कई विधायक भी अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी पहुंच चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, नए मंत्रिमंडल में पुराने और नए चेहरों का मिश्रण देखने को मिल सकता है। जातीय समीकरण, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सिद्धरमैया समर्थक नेताओं को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाने की कोशिश की जाएगी। यह भी चर्चा है कि कई उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं और सिद्धरमैया मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों को नए मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलेगी। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल गठन को लेकर विचार-विमर्श अभी जारी है।
