पुलिसिया जांच में कितना महत्वपूर्ण है चार्जशीट, विस्तार से जानकारी

  • Authored by: ललित राय
  • Updated Jun 16, 2023, 02:14 PM IST

What is a Charge sheet: आपराधिक मामलों में जांच अधिकारी या जांच एजेंसियों के द्वारा आरोपी या आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र यानी चार्जशीट दायर की जाती है।

What is a Charge sheet: अपराध की दुनिया से अगर आप परिचित होंगे तो एफआईआर और चार्जशीट के बारे में जरूर सुनते होंगे। सामान्य तरह से समझें तो किसी भी अपराध के होने पर पीड़ित अपनी बात पुलिस के सामने रखता है और जांच शुरू हो जाती है। अगर आप दो रुपए की चोरी करें या लाख की करें पीड़ित की शिकायत पर पुलिस केस दर्ज करती है और आरोपी की धरपकड़ शुरू होती है। जब आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ जाता है तो जांच अधिकारी उससे पूछताछ करता है और तय समय सीमा (60 से 90 दिन के अंदर) में आरोपपत्र दाखिल करता है जिसे अंग्रेजी में दर्ज करता है। वहीं जब पीड़ित की जानकारी पर केस दर्ज होता है तो उसे एफआईआर या प्राथमिक सूचना रिपोर्ट कहा जाता है। यहां पर हम चार्ज शीट और एफआईआर(FIR) में फर्क बताने के साथ आरोप पत्र के बारे में पूरी जानकारी देंगे।

क्या है चार्जशीट

सीआरसीपीस के सेक्शन 173 में चार्जशीट की परिभाषा दी गई है। इस सेक्शन के मुताबिक किसी केस की जांच करने वाला पुलिस अधिकारी या जांच एजेंसी अंतिम रिपोर्ट बनाता है। के वीरास्वामी बनाम भारत सरकार और अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सीआरपीसी के सेक्शन 173(2) के तहत चार्जशीट अंतिम रिपोर्ट है। चार्जशीट को किसी आरोपी के खिलाफ 60 से 90 दिनों के अंदर जांच अधिकारी द्वारा अदालत में पेश किया जाता है। अगर ऐसा नहीं होता है कि आरोपी के गिरफ्तारी को अवैध माना जाता है और आरोपी जमानत पाने का हकदार बन जाता है।

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