राज्यसभा में सोमवार का दिन नए सभापति सी. पी. राधाकृष्णन के स्वागत के साथ शुरू हुआ, लेकिन जल्द ही विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने स्वागत भाषण के दौरान पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के “अचानक” इस्तीफे का उल्लेख किया, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे (फोटो- संसद टीवी)
ये भी पढ़ें- 'काशी गए, नॉन वेज छोड़ने का प्रण लिया...', जब PM मोदी ने संसद में सुनाई उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन की प्रेरणादायक कहानी
नए सभापति के स्वागत में राजनीतिक तकरार
विपक्ष की ओर से खरगे ने सभापति का स्वागत करते हुए कहा कि कांग्रेस ‘‘संविधानिक मूल्यों और सदन की परंपराओं’’ के साथ दृढ़ता से खड़ी है और कार्यवाही के सुचारू संचालन में सहयोग करेगी। उन्होंने यह भी कहा, ‘‘सदन की कार्यवाही का निष्पक्ष संचालन और प्रत्येक पार्टी के सदस्यों को समान अवसर देना इस पद की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।’’ खरगे ने जिक्र किया कि राधाकृष्णन तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके सी के कुप्पुस्वामी के रिश्तेदार हैं, जो कांग्रेस के सदस्य थे। उन्होंने कहा, ‘‘बेहतर होगा कि आप दोनों तरफ संतुलन बनाए रखें। मैं आपके सफल कार्यकाल की कामना करता हूं... आप जिस पृष्ठभूमि से आते हैं, उसका प्रधानमंत्री ने जिक्र किया, लेकिन आपको यह भी नहीं भूलना चाहिए कि आप एक कांग्रेसी परिवार से हैं।’’
खरगे का धनखड़ के इस्तीफे पर सवाल
उन्होंने कहा कि धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया था और उनका अचानक पद छोड़ना संसदीय इतिहास में असामान्य घटना है। उन्होंने कहा, “मुझे आपके पूर्ववर्ती के अचानक और अप्रत्याशित रूप से पद छोड़ने का उल्लेख करना पड़ रहा है…। मुझे निराशा है कि सदन को उन्हें विदाई देने का अवसर नहीं मिला।”
सत्ता पक्ष का कड़ा विरोध
उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष तुरंत आक्रोशित हो गया। सदन के नेता जे. पी. नड्डा और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू दोनों ने इस मंच पर धनखड़ के इस्तीफे के मुद्दे को उठाना अनुचित बताया। किरेन रिजिजू ने कहा कि यह “गंभीर और पवित्र अवसर” था, ऐसे में विपक्ष के नेता को यह मुद्दा नहीं लाना चाहिए था। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि विपक्ष ने धनखड़ के खिलाफ दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया था, जिसने सदन की गरिमा को प्रभावित किया। नड्डा ने भी कहा कि अगर विपक्ष ऐसे विषय उठाएगा, तो सत्ता पक्ष को भी पिछली घटनाओं और विपक्ष के रवैये की याद दिलानी पड़ेगी।
