Harish Rawat: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत शनिवार को वर्ष 2016 के ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के देहाती/देहरादून स्थित क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचे। ED दफ्तर में प्रवेश करते समय हरीश रावत अपने गले में अपनी दिवंगत माता जी की तस्वीर पहने हुए नजर आए। पूछताछ से ठीक पहले उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर बताया कि उन्हें दो दिन पहले ही ED का समन मिला था, जिसके बाद वे केंद्रीय जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित हुए हैं।
हरीश रावत से ईडी की पूछताछ (@harishrawatcmuk/X)
क्या है 2016 भर्ती घोटाला मामला?
यह पूरा मामला उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा 2016 में आयोजित की गई ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (VPDO) भर्ती परीक्षा में हुई कथित धांधली और भ्रष्टाचार से जुड़ा है। उस दौरान राज्य में हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी। इसी मामले की जांच की कड़ी में 10 सितंबर को ED ने देहरादून में कई स्थानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान हरीश रावत के वर्तमान निजी सहायक चंदन सिंह जीना के आवास पर भी तलाशी ली गई थी। गौरतलब है कि जीना, हरीश रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान उनके विशेष कार्याधिकारी (OSD) के रूप में तैनात थे।
निजी सहायक के घर मिले कैश और ज्वेलरी, दिया था इस्तीफा
ED की इस कार्रवाई के दो दिन बाद यानी 12 सितंबर को, अपने पीए के घर से भारी मात्रा में नकदी और आभूषण बरामद होने के बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए हरीश रावत ने कांग्रेस पार्टी के सभी सांगठनिक पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। अपने वीडियो संदेश में पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि ED ने उनसे एक लंबी सूची के रूप में पुराने दस्तावेजों की मांग की है।
ITR और संपत्ति का ब्योरा
एजेंसी ने उनसे पिछले कई वर्षों के इनकम टैक्स रिटर्न, उनकी व्यक्तिगत संपत्तियों और उनके परिवार के सदस्यों की चल-अचल संपत्ति की पूरी जानकारी मांगी है। रावत ने कहा कि समन में परिवार से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि 'परिवार' की परिभाषा में कौन-कौन शामिल है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार बड़ा है और उनकी बेटियाँ विवाहित हैं, ऐसे में परिवार के हर सदस्य के पुराने कागजात इतने कम समय में जुटा पाना बेहद कठिन है। हरीश रावत ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने ED दफ्तर आने की जानकारी पूर्व में किसी भी समर्थक या पार्टी कार्यकर्ता को नहीं दी थी, ताकि किसी तरह का हंगामा न हो।
