कब्रिस्तान को देखकर एक नजर में अधिकतर लोग या तो नजरें फेर लेते हैं या नाक-मुंह सिकोड़ते हैं। किसी की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है तो कोई उस पर बात नहीं करना चाहता, मगर हमारे ही हिंदुस्तान में एक कब्रिस्तान है, जहां पर विभिन्न समुदाय के लोग मजे से चाय की चुस्कियां लेते हुए चर्चा करते हैं। जी हां, सही पढ़ा और सुना आपने...हम बात कर रहे हैं उस चाय की दुकान पर है, जो कब्रिस्तान के ऊपर बनी है। सबसे रोचक बात है कि वहां आज भी कब्रें और लोग उनके इर्द-गिर्द बैठकर ही चाय-नाश्ता करते हैं।
लकी टी स्टॉल अहमदाबाद शहर के पुराने हिस्से में मुस्लिम बहुल इलाके में है, जहां सभी समुदाय के लोग आकर चाय-नाश्ता करते हैं।
यह चाय का ठीया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में है। अहमदाबाद शहर के पुराने हिस्से में मुस्लिम बहुल इलाके में यह दुकान है। लगभग 62 साल पुराने इस स्टॉल का नाम "लकी टी स्टॉल" है, जहां पर पारंपरिक कप-प्लेट में मसाला और कटिंग चाय मिलती है। वैसे, यहां का बंद मस्का और बंद जैम भी लोग बड़े चाव से खाते हैं, जबकि शाकाहारी स्टॉल का संचालन मुस्लिम समुदाय के लोग करते हैं।
जहां आज टी स्टॉल चल रहा है, वहां पेड़ भी है, उसकी छाया भी और कब्रें भी। वेटर के मुताबिक, यहां कुल 26 कब्रें हैं और उनमें से कुछ के आजू-बाजू में ग्रिल भी हैं। ये सारी कब्रें 500 से 600 साल पुरानी बताई जाती हैं। स्टॉल के मौजूदा मालिकों में से एक राजीव नायर ने एक अखबार को इस स्टॉल की कहानी सुनाते हुए बताया था, "पहले दुकान कब्रिस्तान के बगल में नीम के पेड़ के नीचे थी। फिर काम बढ़ा तो आस-पास दुकान का विस्तार किया गया। अब हम यहां हर रोज फूल से कब्रों को सजाते हैं और साफ-सफाई रखते हैं।" वे लोग इन कब्रों को किसी गुडलक से कम नहीं मानते।
वैसे, इस दुकान का दिवंगत पेंटर मकबूल फ़िदा हुसैन (एफएफ हुसैन) से भी कनेक्शन है। स्टॉल में आज भी उनकी बनाई हुई ओरिजिनल पेटिंग टंगी है। ऐसा बताया गया कि साल 1994 में असल मालिक केएच मोहम्मद भाई को हुसैन साहब ने इसे गिफ्ट किया था। हुसैन साहब जब भी शहर आते तो इस दुकान पर जरूर आते।
यही नहीं, हुसैन साहब के लिए इस स्टॉल से थर्मस फ्लास्क में चाय लंदन भी भेजी गई थी और उसे लेकर उनके दोस्त गए थे। मोहम्मद भाई का कुछ साल पहले इंतकाल हो गया, मगर उनके स्टॉल साझेदारों ने वादा किया था कि वह इस दुकान को बेचेंगे नहीं।
