केंद्र सरकार ने डिजिटल स्पेस को सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act) और आईटी नियम, 2021 (IT Rules) के तहत सोशल मीडिया और अन्य इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म्स के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में दी। उन्होंने बताया कि खासतौर पर डीपफेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए कंटेंट पर नियंत्रण के लिए नियामक ढांचे को और मजबूत किया गया है।
डीपफेक पर सरकार की सख्ती। (फोटो- AI)
डीपफेक और सिंथेटिक कंटेंट के जरिए समाज में पैदा हो रही समस्या
लोकसभा में 25 मार्च 2026 को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि सरकार लगातार ऐसे उपाय कर रही है, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर गलत, भ्रामक और आपत्तिजनक कंटेंट के प्रसार को रोका जा सके। सरकार ने यह भी माना है कि नई तकनीकों के दुरुपयोग से समाज में गंभीर जोखिम पैदा हो रहे हैं, खासकर डीपफेक और सिंथेटिक कंटेंट के जरिए।
सरकार ने उठाए ये कदम
उन्होंने बताया कि सरकार ने इंटरमीडियरी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कई बार एडवाइजरी जारी कर यह स्पष्ट किया है कि उन्हें IT Act और IT Rules के तहत ‘ड्यू डिलिजेंस’ यानी उचित सतर्कता के नियमों का पालन करना होगा। दिसंबर 2023, मार्च 2024, दिसंबर 2025, फरवरी 2026 और मार्च 2026 में जारी विभिन्न एडवाइजरी में प्लेटफॉर्म्स को चेताया गया कि वे अवैध और आपत्तिजनक कंटेंट को रोकने के लिए सख्त कदम उठाएं।सरकार ने 10 फरवरी 2026 को IT Rules में संशोधन कर सिंथेटिकली जनरेटेड इंफॉर्मेशन (SGI), जैसे डीपफेक और AI से बनाए गए कंटेंट, से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए नए प्रावधान जोड़े हैं। इसके तहत अब सोशल मीडिया कंपनियों को तकनीकी उपाय अपनाने होंगे, जिससे फेक या भ्रामक AI कंटेंट को बनने और फैलने से रोका जा सके। नए नियमों के अनुसार, प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि AI से बनाए गए वैध कंटेंट पर स्पष्ट लेबलिंग और ट्रेसेबल मेटाडेटा हो, ताकि यूजर्स आसानी से पहचान सकें कि यह कंटेंट असली है या कृत्रिम रूप से तैयार किया गया है। इसके अलावा, यूजर्स को यह भी जागरूक करना होगा कि अवैध AI कंटेंट बनाने या साझा करने के क्या कानूनी परिणाम हो सकते हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि बच्चों से जुड़े यौन शोषण सामग्री, गैर-सहमति वाली निजी तस्वीरें (NCII), किसी की पहचान की नकल (इंपर्सोनेशन) और अन्य हानिकारक AI कंटेंट को रोकना प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी होगी। ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई करना अनिवार्य होगा। एक अहम प्रावधान के तहत अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को किसी अदालत या सरकार के आदेश मिलने के तीन घंटे के भीतर अवैध कंटेंट हटाना होगा। यह नियम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सरकार ने पहले ही 11 नवंबर 2025 को एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी किया था, जिसमें बिना सहमति के साझा की गई निजी तस्वीरों (NCII) के खिलाफ कार्रवाई के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए थे। इसमें पीड़ितों, प्लेटफॉर्म्स और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका तय की गई है।
