Ghulam Nabi Azad: विपक्ष को एकजुट करने के लिए अभियान चला रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने एक बयान से सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। नीतीश ने कहा कि 2024 का लोकसभा चुनाव समय से पहले हो सकता है। उनके इस बयान के कई मतलब निकाले जा रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस के पूर्व दिग्गज नेता एवं डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) के अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने विपक्षी एकता एवं एकजुटता पर सवाल उठाए हैं। आजाद ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता से कोई लाभ होगा इस पर उन्हें संदेह है।
पटना में 23 जून को होनी है विपक्ष की बैठक।
आजाद बोले-मुझे बैठक के लिए नहीं बुलाया गया
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा बुलाई गई विपक्षी दलों की बैठक के बारे में पूछे जाने पर आजाद ने कहा कि उन्हें इसमें आमंत्रित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, 'विपक्षी एकता का लाभ तभी मिलेगा जब दोनों पक्षों के लिए कुछ होगा। दोनों के लिए लाभ के हिस्से में अंतर हो सकता है - यह 50-50 या 60-40 हो सकता है - लेकिन इस मामले में, दोनों पक्षों के पास दूसरे को देने के लिए कुछ भी नहीं है।'
पटना में 23 जून को है विपक्षी दलों की बैठक
बिहार के सीएम नीतीश ने 23 जून को पटना में विपक्षी दलों की एक बड़ी बैठक बुलाई है। इस बैठक में कांग्रेस सहित विपक्ष की ज्यादातर पार्टियां शामिल होंगी। इस बैठक के जरिए विपक्ष अपनी ताकत का प्रदर्शन करेगा। बैठक में विपक्ष की एकता एवं एकजुटता दिखाने की कोशिश होगी। पहले यह बैठक 11 जून को होनी थी लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे एवं राहुल गांधी की व्यस्तता के चलते यह बैठक 23 जून को हो रही है।
चुनाव पहले भी हो सकता है-नीतीश
ग्रामीण कार्य विभाग की 6,680.67 करोड़ रुपये की 5,061 परियोजनाओं का शुभारंभ करने के मौके पर विभाग के इंजीनियरों और विभिन्न अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से संबोधित करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा, 'मुझे बताया गया है कि लंबित कार्य जनवरी, 2024 तक पूरे हो जाएंगे। मैं कहूंगा, इससे पहले इन्हें पूरा करने का प्रयास करें। आप कभी नहीं जानते कि चुनावों की घोषणा कब हो सकती है। चुनाव अगले साल नहीं, पहले भी हो सकते हैं।'
मोदी सरकार पर निशाना साधा
मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए नीतीश ने कहा कि कि केन्द्र ने 2015 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना पर खर्च में अपना हिस्सा घटाकर 60 फीसदी कर दिया, जबकि 40 फीसदी राज्यों को वहन करने के लिए छोड़ दिया। उन्होंने कहा, कि ग्रामीण सड़क योजना अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा 2000 में शुरू की गई थी, उस वक्त केन्द्र पूरा खर्च वहन कर रहा था लेकिन अब यह हिस्सेदारी 50-50 की हो गई है।
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