CJP Protest: जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करना और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर एक माह से भी ज्यादा समय से छात्र आंदोलन कर रहे हैं। आजाद भारत के इतिहास का यह पहला GenZ आंदोलन है, जहां आंदोलनकारी युवक अपने नन्हें बच्चों को लेकर भी शामिल हो रहे हैं। इस बीच, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को GenZ और छात्रों की बहुत बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले इस आंदोलन की शुरुआत हुई और 20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च के दौरान पुलिसिया एक्शन दिखाई दिया, जहां आंदोलनकारी छात्रों पर आंसू गैस के गोले दागे गए और लाठीचार्ज भी हुआ, लेकिन ऐसे भी आरोप हैं कि कुछ उपद्रवी छात्रों ने शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक रूप देने की कोशिश की। दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं और उनसे जुड़े वीडियो और तस्वीरों से सोशल मीडिया पटा हुआ है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल अब यह खड़ा हो रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद क्या अब आंदोलनकारी छात्र जंतर-मंतर खाली कर देंगे? हर कोई इसका जवाब खोज रहा है तो चलिए जानते हैं कि सीजेपी की आगे की क्या योजना है।
क्या खत्म होगा छात्र आंदोलन?
आंदोलनकारी छात्रों की मुख्य मांग (धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा) अब पूरी हो चुकी है, लेकिन आंदोलन अभी समाप्त होने वाला नहीं है, ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि सीजेपी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तत्काल बाद अपडेटेड डिमांड रोस्टर जारी किया। जिसके जरिए यह बताने की कोशिश की गई कि अभी महज एक डिमांड ही पूरी हुई है और तीन डिमांड अभी बाकी है। और जंतर-मंतर और पूरा देश अभी भी बाकी मांगों का इंतजार कर रहा है।
झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए... सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह प्रतिक्रिया दी। इस दौरान, उन्होंने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को भी याद किया। उन्होंने कहा, ''देश में लोकतंत्र है और हमें डरना नहीं है। ये लोग क्या कहते थे, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते। हम कहना चाहते हैं कि झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।''
CJP Demands
छात्र आंदोलन की शुरुआत से लेकर 25 जुलाई दिन शनिवार तक, जब धर्मेंद्र प्रधान ने मंत्रिमंडल को अलविदा कहा, GenZ ने नए-नए तरीकों से विरोध दर्ज कराया और अभी भी लगातार मीडिया, सोशल मीडिया इत्यादि के जरिए वह अपनी बात रख रहे हैं और उनकी प्रमुख मांगों में पेपर लीक से आहत होकर आत्महत्या करने वाले सभी छात्रों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। आजाद भारत के इतिहास का यह पहला GenZ आंदोलन है, जो सफल होता हुआ दिखाई दे रहा है। लोकतंत्र पर भरोसा रखने वाले GenZ नए तरीकों से बदलाव की बात करते हैं और जब वह सड़कों पर उतरे तो आंदोलन की तस्वीर बदल गई। वह लाठियां चलाने वाले सुरक्षाकर्मियों को फूल देते हुए दिखाई दिए। उन्होंने अपने हिस्से का खाना, पानी इत्यादि ऑफर किया। इतना ही नहीं, उन्होंने ने तो सुरक्षाकर्मियों से ही पूछना शुरू कर दिया- क्या आप हम पर लाठियां चलाएंगे? मारिएगा नहीं। हम आपके बच्चे जैसे हैं। ऐसे तमाम वीडियो इंस्टाग्राम, फेसबुक सहित तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, टाइम्स नाउ नवभारत ऐसे किसी भी वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
कौन-कौन सी डिमांड अभी बाकी है?
सीजेपी ने अपडेटेड रोस्टर के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मिल गया है, लेकिन तीन डिमांग अभी पेंडिंग हैं।
- आत्महत्या करने वाले सभी छात्रों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा
- प्रदर्शनकारी छात्र के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
- आरएएफ और दिल्ली पुलिस सार्वजनिक तौर पर माफी मांगे।
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सीजेपी से चर्चा कर रही सरकार
सरकार के प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह शामिल हैं, जिन्हें सीजेपी प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद एक बार फिर शनिवार को सीजेपी प्रतिनिधिमंडल जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात की। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सीजेपी की बाकी मांगें कब तक पूरी होती हैं।
छात्र आंदोलन को मिला विपक्ष का साथ
सीजेपी के बैनर तले खड़े हुए इस छात्र आंदोलन को विपक्षी दलों ने अपना समर्थन दिया जिसमें कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, शिवसेना, एनसीपी (एसपी), तृणमूल कांग्रेस, माकपा, भाकपा सहित अन्य पार्टिया शामिल हैं।
