Ladakh News: लद्दाख अपनी बेमिसाल खूबसूरती के साथ-साथ खतरनाक हालात और रहस्यमयी घटनाओं के लिए भी जाना जाता है। 9 जनवरी को यहां घूमने पहुंचे चार दोस्तों के साथ ऐसा वाकया हुआ, जिसने उनके परिजनों ही नहीं बल्कि लद्दाख पुलिस और प्रशासन को भी चिंता में डाल दिया। मामला भारत-चीन सीमा (LAC) से सटे पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र का है, जो पहले भी सैन्य तनाव के कारण सुर्खियों में रह चुका है। ऐसे संवेदनशील इलाके से चार युवकों का अचानक लापता हो जाना और लगातार चार दिनों तक उनका कोई पता न चलना किसी बड़े हादसे की आशंका को जन्म दे रहा था। हालांकि 13 जनवरी को आई एक खबर ने सभी को बड़ी राहत दी।
लद्दाख में चार दोस्त खोए! जानें फिर क्या हुआ? (सांकेतिक फोटो)
न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, शिवम चौधरी, जयवीर चौधरी, यश मित्तल और शुभांशु फौजदार नाम के ये चारों युवक पर्यटन के लिए लद्दाख आए थे। वे एक ही कार से यात्रा कर रहे थे और आखिरी बार 9 जनवरी को प्रसिद्ध पैंगोंग झील के आसपास देखे गए थे। इसके बाद उनका किसी से कोई संपर्क नहीं हो पाया। न तो उनके मोबाइल फोन मिल रहे थे और न ही जीपीएस के जरिए उनकी लोकेशन का पता चल सका। जनवरी के महीने में लद्दाख में तापमान अक्सर माइनस 15 से माइनस 25 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। ऐसे कठोर मौसम में बिना किसी संपर्क के चार दिनों तक लापता रहना बेहद खतरनाक माना जाता है। जिस कार से वे सफर कर रहे थे, उस पर आगरा का रजिस्ट्रेशन नंबर लगा हुआ था, जिससे यह अनुमान लगाया गया कि वे उत्तर प्रदेश के निवासी हो सकते हैं।
प्रशासन में हड़कंप
चार युवकों के लापता होने की सूचना मिलते ही प्रशासन इसलिए भी सतर्क हो गया था, क्योंकि पैंगोंग झील का एक हिस्सा चीन के नियंत्रण में आता है। यही वह क्षेत्र है जहां ‘फिंगर एरिया’ को लेकर पहले भारत और चीन की सेनाओं के बीच तनाव और झड़पें हो चुकी हैं। 12 जनवरी तक जब इनका कोई सुराग नहीं मिला, तो यह आशंका गहराने लगी कि कहीं वे भटककर नो-मैन्स लैंड में न पहुंच गए हों या फिर किसी बर्फीले तूफान में फंस गए हों। पैंगोंग से आगे के रास्ते बेहद कठिन हैं और वहां मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह से काम नहीं करता। पैंगोंग क्षेत्र की निगरानी करने वाली टांगत्से पुलिस पोस्ट ने तुरंत ‘मिसिंग पर्सन अलर्ट’ जारी किया। लद्दाख के सभी थानों और चेक पोस्टों को सतर्क कर दिया गया। आगरा रजिस्ट्रेशन वाली उस कार का पता लगाने के लिए पुलिस की गश्ती टीमें दुर्गम और बर्फ से ढके पहाड़ी इलाकों में सर्च ऑपरेशन में जुट गईं।
कहां मिले युवक?
हालांकि, 13 जनवरी 2026 को आखिरकार राहत भरी खबर सामने आई। टांगत्से पुलिस पोस्ट के प्रभारी ने पुष्टि की कि चारों लापता युवक सुरक्षित मिल गए हैं। चौंकाने वाली बात यह रही कि वे पैंगोंग झील के आसपास नहीं, बल्कि उससे काफी दूर व्हिस्की नाला और पांग–सरचू रोड के पास पाए गए। यह इलाका लेह–मनाली हाईवे पर स्थित है। इससे अनुमान लगाए जा रहे हैं कि या तो वे रास्ता भटककर इस सुनसान और कठिन क्षेत्र में पहुंच गए थे, या फिर लौटते वक्त खराब मौसम या वाहन में खराबी के कारण वहीं फंस गए। व्हिस्की नाला खड़ी चढ़ाइयों और खराब सड़कों के लिए जाना जाता है, जहां सर्दियों में ड्राइव करना बेहद जोखिम भरा होता है।
पुलिस ने क्या बताया?
पुलिस ने बताया कि युवकों के सुरक्षित मिलने के बाद सर्च ऑपरेशन आधिकारिक तौर पर समाप्त कर दिया गया है। फिलहाल सभी सुरक्षित बताए जा रहे हैं। पुलिस ने कहा कि, यह घटना उन लोगों के लिए एक अहम चेतावनी है जो सर्दियों में लद्दाख जैसे इलाकों में सेल्फ-ड्राइविंग का जोखिम उठाते हैं। पैंगोंग जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में गूगल मैप्स कई बार सही रास्ता नहीं दिखा पाता। जनवरी के महीने में पांग और सरचू जैसे इलाकों में कई फीट बर्फ जमी रहती है और सड़कें अक्सर बंद हो जाती हैं। सैटेलाइट फोन के बिना इन दूरदराज इलाकों में जाना खतरे से खाली नहीं, क्योंकि मीलों तक इंसानी आबादी नजर नहीं आती। सौभाग्य से उत्तर प्रदेश के इन चार दोस्तों की कहानी सुरक्षित अंत तक पहुंची, वरना लद्दाख की कड़ाके की सर्द रातें अक्सर जानलेवा साबित हो सकती हैं।
