पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेसी नेता श्री प्रकाश जायसवाल का शुक्रवार शाम को निधन हो गया। 81 वर्ष की आयु में उन्होंने कानपुर में अंतिम सांस ली। परिवार के मुताबिक उन्हें हार्ट अटैक के बाद कार्डियोलाजी लाया गया, जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। श्रीप्रकाश जायसवाल तीन बार लगातार कानपुर से सांसद रहे हैं। वो मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय कोयला मंत्री के रूप में भी उन्होंने योगदान दिया।
दिग्गज कांग्रसे नेता और पूर्व मंत्री प्रकाश जायसवाल का निधन।(फोटो सोर्स: shree prakash jaiswal)
सीएम योगी ने दी श्रद्धांजलि
सीएम योगी आदित्यनाथ ने ‘एक्स’ पर लिखा,''पूर्व केंद्रीय मंत्री, वरिष्ठ राजनेता श्री श्रीप्रकाश जायसवाल जी का निधन अत्यंत दुःखद है। उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि!'' उन्होंने कहा,''प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान व शोकाकुल परिजनों को यह अथाह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।ॐ शांति!''
खरगे ने निधन पर जताया दुख
वहीं, खरगे ने जायसवाल के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि वह एक सच्चे एवं निष्ठावान कांग्रेसी थे जिन्होंने कानपुर के विकास व कल्याण के लिए पूरी ईमानदारी से जनसेवा का कार्य किया।
खरगे ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘संप्रग सरकार में मेरे सहयोगी रहे, पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता श्रीप्रकाश जायसवाल जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। वह एक सच्चे और निष्ठावान कांग्रेसी थे जिन्होंने कानपुर के विकास व कल्याण के लिए पूरी ईमानदारी से जनसेवा का कार्य किया।" उन्होंने कहा कि उनका जाना कांग्रेस पार्टी के लिए भी एक बड़ी क्षति है। खरगे ने कहा, ‘‘दुःख की इस घड़ी में उनके परिजनों व समर्थकों के प्रति मैं अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।"
लोकसभा चुनाव में लगाई जीत की हैट्रिक
उन्होंने कानपुर के बीएनएसडी इंटर कॉलेज में पढ़ाई पूरी की। उनकी राजनीतिक करियर की शुरुआत 1989 में कानुपर शहर में महापौर बनने से शुरू हुई। वर्ष 1999 में वो कानपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद उन्होंने साल 2004 और 2009 में लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की।
यूपीए के पहले कार्यकाल में श्रीप्रकाश जायसवाल को गृह राज्य मंत्री बनाया गया। इस पद पर वो 23 मई 2004 से 22 मई 2009 तक रहे। इसके बाद उन्होंने यूपीए-2 में 19 जनवरी 2011 से 26 मई 2014 तक वे कोयला मंत्री भी रहे।
उन्होंने उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया था। वो 2000 से लेकर 2002 तक इस पद पर रहे।
साल 2009 में ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों पर हुए हमलों के बाद, जायसवाल हालात का खुद जायजा लेने के लिए खुद मेलबर्न गए। वर्ष 2014 के चुनाव में हार के बाद भी, जायसवाल कानपुर की राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय रहे और अपनी सादगी, शांत व्यवहार और आसानी से मिलने-जुलने की आदत के लिए बहुत पसंद किए जाते थे।
