Amarnath Yatra : अमरनाथ यात्रा पर निकला श्रद्धालुओं का पहला जत्था आज बाबा बर्फानी का दर्शन करेगा। करीब 7 हजार श्रद्धालु बाबा के दर्शन करेंगे। पहलगाम और बालटाल से श्रद्धालु अमरनाथ के लिए निकल पड़े हैं। दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह और जोश देखा गया है। वे रास्ते भर 'हर हर भोले' का जयघोष करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। बता दें कि श्रद्धालुओं का पहला जत्था गुरुवार को पहलगाम और बालटाल से रवाना हुआ। यात्रा पर आतंकी साए को देखते हुए सुरक्षा की भारी भरकम व्यवस्था की गई है। यात्रा की निगरानी सीसीटीवी और ड्रोन से की जा रही है। अमरनाथ यात्रा 19 अगस्त तक चलेगी।
रास्ते में सुरक्षा के भारी बंदोबस्त।
चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात
यात्रा के दौरान रास्ते में श्रद्धालुओं को किसी तरह की कोई परेशानी न हो इसके लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन की तरफ से व्यवस्थाएं की गई हैं। श्रद्धालुओं के लिए पानी, खाने और मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध हैं। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। अधिकारियों ने बताया कि 4603 तीर्थयात्रियों का पहला जत्था कड़ी सुरक्षा के बीच शुक्रवार को कश्मीर घाटी पहुंचा। स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने कई स्थानों पर पुलिस और नागरिक प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ श्रद्धालुओं का स्वागत किया। यात्रियों को जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से रवाना किया गया था। यात्रियों के जत्थे का प्रशासन और कश्मीर जाने वाले लोगों ने कुलगाम, अनंतनाग, श्रीनगर और बांदीपुरा जिलों में फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया गया।
यह भी पढ़ें-PM के हाथों नहीं हुआ था हादसे वाले टर्मिनल का उद्घाटन, उड्डयन मंत्री बोले-मौका देख राजनीति करना ठीक नहीं
इस साल साढ़े तीन लाख लोगों ने पंजीकरण कराया
शनिवार को अनंतनाग में पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और गांदेरबल में 14 किलोमीटर लंबे बालटाल मार्ग से यह 52 दिवसीय तीर्थयात्रा शुरू होगी और 19 अगस्त को संपन्न होगी। अधिकारियों ने बताया कि तीर्थयात्री 231 हल्के और भारी वाहनों के काफिले के साथ दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के काजीगुंड इलाके में नवयुग सुरंग के जरिए घाटी पहुंचे, जहां उनका स्वागत कुलगाम के उपायुक्त (डीसी) अतहर आमिर खान, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक , नागरिक समाज के सदस्यों, व्यवसायियों, फल उत्पादकों और बाजार संघों ने किया। इस साल की अमरनाथ यात्रा के लिए तीन लाख पचास हजार से ज्यादा लोगों ने पंजीकरण कराया है। पवित्र गुफा तक पहुंचने के दोनों मार्गों पर 125 सामुदायिक लंगर स्थापित किए गए हैं और 6,000 से अधिक स्वयंसेवक श्रद्धालुओं की सहायता कर रहे हैं।
