क्रीमी लेयर सिद्धांत की वकालत करने पर अपने ही समुदाय से आलोचना का सामना करना पड़ा, बोले पूर्व CJI गवई

पूर्व सीजेआई गवई ने कहा कि इंद्रा साहनी एवं अन्य बनाम भारत संघ मामले में क्रीमी लेयर सिद्धांत को प्रतिपादित किया गया था, और एक अन्य मामले में उन्होंने स्वयं कहा था कि क्रीमी लेयर को अनुसूचित जातियों पर भी लागू किया जाना चाहिए।

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई ने कहा है कि अनुसूचित जातियों के आरक्षण में क्रीमी लेयर सिद्धांत लागू होने संबंधी अपने फैसले पर उनके अपने ही समुदाय के लोगों द्वारा उनकी व्यापक आलोचना की गई है। गवई ने कहा कि डॉ. बी आर आंबेडकर के विचार में सकारात्मक कार्रवाई किसी पिछड़े व्यक्ति को साइकिल देने जैसा है। उन्होंने पूछा कि क्या आंबेडकर सोचते थे कि ऐसे व्यक्ति को कभी साइकिल नहीं छोड़नी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि आंबेडकर ऐसा नहीं सोचते थे।

EX CJI Gavai

Ex- CJI बीआर गवई (PTI)

हाल ही में मुख्य न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त हुए गवई शनिवार को मुंबई विश्वविद्यालय में "समान अवसर को बढ़ावा देने में सकारात्मक कार्रवाई की भूमिका" विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। आंबेडकर की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए गवई ने कहा कि यह प्रतिष्ठित नेता न केवल भारतीय संविधान के निर्माता थे, बल्कि इसमें निहित सकारात्मक कार्रवाई के भी निर्माता थे।

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