US VISA Fraud Case: उत्तर भारत के कुछ राज्यों की निजी आव्रजन सहायता एजेंसियां अमेरिकी वीजा आवेदकों के बैंक खातों में ''अल्प अवधि'' के लिए 40 लाख रुपये कथित तौर पर जमा करती थीं ताकि उनके लिए ''झूठी'' वित्तीय स्थिति को लेकर दस्तावेज तैयार किया जा सके और उन्हें यात्रा अनुमति प्राप्त करने में मदद मिल सके। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक नए आरोपपत्र में यह दावा किया है।
केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (फाइल फोटो)
केंद्रीय एजेंसी ने सोमवार को जालंधर की विशेष धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) अदालत के समक्ष ''संगठित'' आव्रजन और वीजा धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में अभियोजन शिकायत (आरोपपत्र) दाखिल की। एजेंसी ने बुधवार को एक बयान में कहा कि ईडी की जांच दिल्ली पुलिस और पंजाब पुलिस द्वारा इस कथित गिरोह के खिलाफ दर्ज की गई कई प्राथमिकी से शुरू हुई थी।
बयान के अनुसार दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर ये प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। इसके अनुसार ये प्राथमिकी एक ''सुनियोजित साजिश'' से संबंधित हैं, जिसमें अमेरिका के लिए छात्र और पर्यटक वीजा प्राप्त करने के लिए जाली शैक्षणिक प्रमाण-पत्र, फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र, जाली वित्तीय विवरण और धनराशि के झूठे प्रमाण तैयार करने और जमा करने का आरोप है।
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एजेंसी ने इस जांच के तहत फरवरी 2025 में दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। यह कार्रवाई तब की गई, जब इन राज्यों के कई भारतीयों समेत कुछ अन्य लोगों को अमेरिकी सैन्य विमानों से निर्वासित कर वापस भेजा गया। एजेंसी ने इन निर्वासित लोगों में से कई के बयान भी दर्ज किये और कुछ करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त कीं।
ईडी ने बताया कि यह आरोपपत्र रेड लीफ इमिग्रेशन जैसी निजी कंपनियों, उसके प्रबंधकों अमनदीप सिंह और पूनम रानी, ओवरसीज पार्टनर, इसके संचालक अंकुर कुमार, रुद्र कंसल्टेंसी सर्विसेज, इसके संचालक नितिन विज और कमलजोत कंसल नामक एक व्यक्ति के खिलाफ दाखिल किया गया है।
