ED Raids At Gujarat Samachar Mumbai Premises: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को मुंबई में गुजरात समाचार से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई प्रकाशन के एक मालिक की मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तारी के कुछ ही दिन बाद हुई है। हालांकि, बाहुबली शाह की गिरफ्तारी को लेकर ईडी ने अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। गुजरात समाचार और जीएसटीवी का प्रकाशन करने वाली लोक प्रकाशन लिमिटेड के निदेशकों में से एक बाहुबली शाह को गुरुवार देर रात केंद्रीय एजेंसी ने गिरफ्तार किया था। हालांकि, उन्हें स्वास्थ्य कारणों से 31 मई तक अंतरिम जमानत दे दी गई।
गुजरात समाचार के मुंबई परिसरों पर ED ने की छापेमारी (प्रतीकात्मक फोटो)
अदालत से मिली जमानत
73 वर्षीय शाह को 10,000 रुपये का जमानती बॉन्ड भरने को कहा गया है। जांच एजेंसी ने मानवीय आधार पर उनकी जमानत का विरोध नहीं किया, लेकिन यह शर्त रखी गई कि उनके स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी नियमित रूप से ईडी को दी जाए। शाह लोक प्रकाशन लिमिटेड के निदेशकों में से एक हैं, जो गुजरात समाचार का मूल संगठन है। उनके बड़े भाई श्रेयांश शाह इस दैनिक अखबार के मैनेजिंग एडिटर हैं। ईडी ने अब तक शाह की गिरफ्तारी के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। ईडी की यह कार्रवाई इनकम टैक्स विभाग द्वारा गुजरात समाचार के परिसरों पर की गई 30 घंटे से अधिक समय तक चली छापेमारी के बाद शुरू हुई थी।
विपक्षी दलों ने उठाए सवाल
वहीं, कांग्रेस विधायक और गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जिग्नेश मेवाणी ने आरोप लगाया कि पिछले 25 वर्षों से गुजरात समाचार केंद्र सरकार की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग करता आया है, इसी कारण से अखबार और इसके मालिकों को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने अखबार पर हुई इस छापेमारी की आलोचना करते हुए इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर गुजरात में इस मुद्दे पर कोई विरोध प्रदर्शन होता है तो वे उसमें शामिल होंगे।
इसी बीच, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने भी ईडी की कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है और इसके खिलाफ आवाज उठाई है। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, इंडियन वीमेन प्रेस कॉर्प्स, प्रेस एसोसिएशन, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स, केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स और वर्किंग न्यूज कैमरा मैन एसोसिएशन ने संयुक्त रूप से कहा कि ईडी की यह कार्रवाई भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक खतरनाक हमला है।
