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DRDO ने फिर चौंकाया: शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम का किया सफल परीक्षण, दुनिया ने देखी भारत की ताकत

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 1, 2024, 06:32 AM IST

DRDO: वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम एक मैन पार्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे पूरी तरह से स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया है। डीआरडीओ ने इसके दो सफल परीक्षण किए और हवा में ही लक्ष्यों को मार गिराया गया।

Very Short-Range Air Defence System: रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक बार फिर से दुनिया को भारत की ताकत का लोहा मनवाया है। डीआरडीओ की ओर से ओडिशा के चांदीपुर से बेहद कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (Air Defence System) का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण 28 और 29 फरवरी को किए गए थे। जानकारी के मुताबिक, जमीन आधारित पोर्टेबल लॉन्चर से दो परीक्षण किए गए।

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि दोनों परीक्षण उड़ानों ने मिशन के उद्देश्यों को पूरा किया और मिसाइलों द्वारा रोका व नष्ट कर दिया गया। बता दें, मिसाइल को दोहरी थ्रस्ट सॉलिड मोटर द्वारा संचालित किया जाता है और इसका उद्देश्य कम ऊंचाई वाले हवाई खतरों को रोकना व नष्ट करना है।

रक्षा मंत्री ने दी बधाई

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल परीक्षण में शामिल डीआरडीओ और भारतीय सेना को बधाई दी। उन्होंने कहा कि आधुनिक प्रौद्योगिकियों से लैस यह नई मिसाइल सशस्त्र बलों को मजबूती प्रदान करेगी और इससे हमारी ताकत में भी इजाफा होगा। बता दें वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम एक मैन पार्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे पूरी तरह से स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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