Digvijaya Singh Padyatra: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए दिए गए चंदे को लेकर एक बार फिर भाजपा और विश्व हिंदू परिषद पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन पर चंदे की हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाते हुए ऐलान किया है कि वे अपना दिया गया चंदा वापस पाने के लिए अयोध्या की अदालत में एक मुकदमा दायर करेंगे।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद दिग्विजय सिंह का नया आरोप
भोपाल में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह का चंदा घोटाला विश्व हिंदू परिषद (VHP) और आरएसएस (RSS) से जुड़े संगठनों ने राम मंदिर के नाम पर किया था, वैसा ही कुछ अब उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में भी देखने को मिल रहा है।
दिग्विजय सिंह ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उज्जैन में सालों पहले स्थापित किए गए 'सरस्वती शिशु मंदिर' स्कूल को अब ढहाया जा रहा है। इसकी जगह वहां 100 कमरों और 100 बिस्तरों वाला एक बड़ा होटल तैयार किया जा रहा है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर के नाम पर दो बार फंड जुटाने का अभियान चलाया गया। पहला अभियान लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा के समय शुरू हुआ था, जिसमें उन्होंने भी योगदान दिया था, लेकिन उस पहले चंदे का आज तक कोई हिसाब-किताब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जब वीएचपी ने दोबारा चंदा जुटाना शुरू किया, तो मैंने उन्हें पैसे नहीं दिए, क्योंकि चंदे का दुरुपयोग करना उनकी पुरानी आदत है। इसलिए मैंने सीधे ट्रस्ट में दान देने का फैसला किया।"
शिवराज सिंह से ज्यादा दिया था दान
कांग्रेस नेता ने बताया कि जब यह अभियान चल रहा था, तब मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ₹1 लाख का दान दिया था। इसी को देखते हुए उन्होंने खुद 1,11,000 रुपये की राशि दान की और बाकायदा इसकी रसीद भी ली। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया था कि यह पैसा सीधे ट्रस्ट के खाते में जमा हो। उन्होंने कहा कि यह दान उन्होंने भगवान राम के प्रति अपनी अटूट आस्था और एक भव्य मंदिर के निर्माण की इच्छा से दिया था।
'हर दिन गायब हो रही है नकदी'
मंदिर के मौजूदा प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि ट्रस्ट के कामकाज की जिम्मेदारी संभाल रहे चंपत राय ने ₹10,000 से ₹15,000 के मासिक वेतन पर कुछ कर्मचारियों को रखा है। आरोप है कि रोज आने वाले चढ़ावे और दान की नकदी में से 10% से 20% हिस्सा (कैश के बंडल) गायब किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि इस गड़बड़ी में बैंक के कुछ अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं, जो करोड़ों राम भक्तों की आस्था पर बहुत बड़ा आघात है।
दिग्विजय सिंह ने साफ किया कि वे इस मामले को लेकर पुलिस के पास नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा, "मुझे पुलिस स्टेशन पर बिल्कुल भरोसा नहीं है, क्योंकि पुलिस पूरी तरह से बीजेपी के नियंत्रण में काम कर रही है। इसलिए मैं सीधे अयोध्या की अदालत का रुख करूंगा। मैं कोर्ट में मुकदमा दायर कर कहूंगा कि मेरे द्वारा दिए गए दान का दुरुपयोग हुआ है, उसे लूटा गया है। इसलिए मेरा पैसा मुझे वापस किया जाए ताकि मैं उसे 'रामलला ट्रस्ट' में सही तरीके से जमा कर सकूं।"
1000 KM की होगी गैर-राजनीतिक पदयात्रा
इन कथित घोटालों के विरोध में दिग्विजय सिंह ने आगामी 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से उज्जैन से लेकर भगवान राम की नगरी अयोध्या तक एक भव्य पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है। उन्होंने साफ किया कि यह पूरी तरह से एक गैर-राजनीतिक आयोजन होगा, जिसमें किसी भी राजनीतिक दल के झंडे या बैनर का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। भगवान राम में आस्था रखने वाला कोई भी आम नागरिक या वे लोग जिन्होंने राम मंदिर के लिए चंदा दिया था, इस यात्रा में शामिल हो सकते हैं।
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रोजाना 10 से 15 KM का होगा सफर
यह दूरी लगभग 1000 किलोमीटर लंबी है, जिसे रोजाना 10 से 15 किलोमीटर पैदल चलकर पूरा किया जाएगा। दिग्विजय सिंह ने यह भी घोषणा की कि अपनी पुरानी 'नर्मदा परिक्रमा यात्रा' की तरह ही वे इस पूरी यात्रा के दौरान फेसबुक और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से पूरी तरह दूरी बनाकर रखेंगे।
