कर्नाटक के प्रसिद्ध तीर्थस्थल धर्मस्थला के पास कथित तौर पर सामूहिक कब्र मिलने के मामले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील रोहित पांडेय ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई को पत्र लिखकर स्वतः संज्ञान लेने की गुजारिश की है। पांडेय ने मांग की है कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम से कराई जाए।
शिकायतकर्ता का सनसनीखेज दावा
इस पूरे मामले की शुरुआत एक पूर्व सफाईकर्मी की गवाही से हुई थी। उसका दावा है कि उसे कई सालों तक 100 से अधिक लाशों को गुपचुप तरीके से दफनाने के लिए मजबूर किया गया। उसने यह भी आरोप लगाया कि यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा था और इस वजह से इलाके में भय और अविश्वास का माहौल है। उसके बयान के सामने आने के बाद ही मामले ने राजनीतिक और कानूनी रूप से तूल पकड़ लिया था।
राज्य सरकार की SIT जांच
शिकायत सामने आने के बाद कर्नाटक सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए SIT का गठन कर दिया था। SIT आरोपों की जांच कर रही है और शुरुआती स्तर पर गवाहों के बयान, घटनास्थल के साक्ष्य और अन्य दस्तावेज एकत्रित कर रही है। हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए विपक्ष और कई संगठनों ने मांग की है कि जांच केवल राज्य स्तर पर सीमित न रहे बल्कि इसकी निगरानी उच्चतम स्तर पर होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट से न्याय की उम्मीद
वकील रोहित पांडेय ने अपनी चिट्ठी में कहा कि यह मामला न केवल मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा है, बल्कि इसमें बड़े पैमाने पर कई हत्या को छुपाने की कोशिश की आशंका भी है। ऐसे में यह जरूरी है कि जांच पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से हो। उन्होंने अपील की कि सुप्रीम कोर्ट इस पर स्वतः संज्ञान ले और रिटायर जज की अध्यक्षता में पूरे मामले की जांच कराए।
